Lok Sabha : इंडिया गठबंधन में सीट को लेकर सपा और रालोद के बीच कोई सहमति बनती नहीं दिख रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की दो सीटों पर गतिरोध दिख रहा है। करीब एक हफ्ते पहले लखनऊ में जयंत चौधरी और अखिलेश यादव के बीच मुलाकात के बाद उनके बीच सात सीटों पर डील हुई थी। जबकि 5 सीटों-बागपत, मुजफ्फरनगर, कैराना, मथुरा, हाथरस- को अंतिम रूप दे दिया गया है लेकिन अभी भी इस बात को लेकर अनिश्चितता है कि मेरठ, बिजनौर, अमरोहा, नगीना और फतेहपुर सीकरी में से आरएलडी को कौन सी दो सीटें आवंटित की जाएंगी।
मुजफ्फरनगर में सपा और रालोद के बीच प्रत्याशी चयन को लेकर गतिरोध पैदा हो गया है। समाजवादी पार्टी वहां से हरेंद्र मलिक को चुनाव लड़ाना चाहती है। सपा के हरेंद्र मलिक रालोद के टिकट पर चुनाव लड़ सकते हैं। हालांकि आरएलडी के कई स्थानीय नेता इसके विरोध में हैं और नहीं चाहते कि हरेंद्र मलिक को मुजफ्फरनगर सीट दी जाए। हरेंद्र मलिक जब कांग्रेस में थे तब से ही उनके और चौधरी परिवार के बीच खींचातनी बनी हुई है। गौरतलब है कि मुजफ्फरनगर सीट चौधरी परिवार की कोर सीट मानी जाती है।
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इसलिए जयंत चौधरी या तो यहां से खुद चुनाव लड़ना चाहते हैं या फिर अपने किसी करीबी को चुनाव लड़ाना चाहते हैं लेकिन यह तय हो गया है कि न तो जयंत चौधरी चुनाव लड़ेंगे और न ही उनकी पत्नी चारू। ऐसे में पार्टी के अंदर कई नेता मुजफ्फरनगर सीट से उम्मीदवारी के लिए दावेदारी कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी मुजफ्फरनगर में संजीव बालियान को मैदान में उतारना चाहती है अगर कोई चौधरी परिवार या हरेंद्र मलिक को चुनौती दे सके। लेकिन जयंत की पार्टी हर हाल में ये सीट अपने लिए चाहती है। वह रालोद चुनाव चिन्ह वाला सपा प्रत्याशी नहीं चाहते।
दावे तो ये भी किए जा रहे हैं कि अगर समाजवादी पार्टी मुजफ्फरनगर में अपना उम्मीदवार उतारती है तो आरएलडी कार्यकर्ताओं के असंतोष को संभालना मुश्किल हो सकता है। हालांकि माना जा रहा है कि मुजफ्फरनगर को लेकर अखिलेश और जयंत के बीच एक फॉर्मूला तय हो गया है। जिसमें हरेंद्र मलिक आरएलडी के सिंबल पर चुनाव लड़ेंगे लेकिन जयंत चौधरी फिलहाल अपने कार्यकर्ताओं से इस पर खुलकर चर्चा नहीं कर रहे हैं।
बसपा के एक प्रमुख गुर्जर चेहरे और चन्द्रशेखर आज़ाद को लेकर भी दोनों में चर्चा हो रही है। जयंत चौधरी नगीना किसी से चन्द्रशेखर रावण को मैदान में उतारना चाहते हैं। जबकि फिलहाल उनकी अखिलेश यादव से कोई सीधी बातचीत नहीं हुई है। माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में आरएलडी को दी जाने वाली सीटों का ऐलान हो सकता है। अगर मुजफ्फरनगर में समाजवादी पार्टी जीतती है तो आरएलडी को औसतन एक सीट ज्यादा दी जा सकती है। इस फॉर्मूले पर भी फिलहाल दोनों पार्टियों के बीच चर्चा हो रही है।


