UP Politics : अक्सर अपनी टिप्पणियों के कारण विवादों (UP Politics) में रहने वाले समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपनी टिप्पणियों के प्रति पार्टी के कुछ नेताओं के व्यवहार पर असंतोष व्यक्त करते हुए मंगलवार को पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया। स्वामी प्रसाद मौर्य के इस कदम के बाद राजनीतिक भूचाल आ गया।
पल्लवी पटेल के संपर्क में हैं स्वामी प्रसाद मौर्य
स्वामी प्रसाद मौर्य का पक्ष लेते हुए पल्लवी पटेल ने कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य लगातार मेरे संपर्क (UP Politics) में हैं। उन्होंने इस्तीफा देने के लिए जो कारण बताया है हम उसका समर्थन करते हैं। वह वरिष्ठ नेता हैं लेकिन उनके साथ गलत व्यवहार किया जा रहा है। मैं दोहराती हूं कि समाजवादी पार्टी को पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समुदाय को उनके अधिकारों से वंचित करना बंद करना चाहिए।
इसी वजह से पल्लवी पटेल सपा से नाराज हैं
बता दें कि समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव को मंगलवार को एक के बाद एक दो सियासी झटके लगे। पहले पार्टी के वरिष्ठ नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने महासचिव पद से इस्तीफा दिया और फिर अपना दल (कामरावादी) की नेता पल्लवी पटेल ने मोर्चा खोल दिया। राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची को लेकर पल्लवी पटेल समाजवादी पार्टी से नाराज हैं। उन्होंने ऐलान किया है कि वह राज्यसभा चुनाव में एसपी उम्मीदवार को वोट नहीं देंगी। पल्लवी पटेल ने कहा कि पीडीए का मतलब पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक है और कुछ अंधे लोग इसे बच्चन और रंजन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
लगातार हमलावर हैं पल्लवी पटेल
गौरतलब है कि पीडीए सपा प्रमुख अखिलेश यादव का नारा है और इसके तहत वह यूपी में पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक मतदाताओं को एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं। सपा से जया बच्चन, पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन और रामजीलाल सुमन राज्यसभा के उम्मीदवार हैं। अब जब पल्लवी पटेल ‘बच्चन और रंजन’ पर हमलावर हैं तो जाहिर है कि सीधा निशाना अखिलेश यादव हैं।
स्वामी प्रसाद मौर्य ने दिया इस्तीफा
मौर्य ने पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव को संबोधित इस्तीफा पत्र सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किया। उन्होंने कहा कि बिना पद के भी वह पार्टी को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे। सपा से विधान परिषद सदस्य मौर्य ने पार्टी अध्यक्ष को लिखे पत्र में कहा कि वह ‘अपने तरीके से’ पार्टी का जनसमर्थन बढ़ाने के लिए काम करते रहेंगे और भाजपा के ‘मकड़ी जाल’ में फंसे दलित और पिछड़े ‘आदिवासियों’ के ‘गौरव’ को जगाने का प्रयास करते रहेंगे।


