Citizenship Amendment Act : ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) से जुड़े मुद्दों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। ओवैसी ने सीएए के कार्यान्वयन पर तत्काल रोक लगाने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है जिसमें आरोप लगाया गया है कि सीएए और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के बीच एक खतरनाक सांठगांठ है जिसमें भारतीय मुसलमानों को निशाना बनाने की योजना है।
उन्होंने अपनी दलील में कहा कि Citizenship Amendment Act (सीएए) केवल नागरिकता प्रदान करने के बारे में नहीं है बल्कि स्पष्ट रूप से इसका उद्देश्य एक विशेष अल्पसंख्यक समुदाय को अलग करना और भेदभाव करना और उन्हें नागरिकता से वंचित करना है। सीएए को लेकर ओवैसी ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की भी आलोचना की है। उन्होंने सरमा के इस दावे पर सवाल उठाया कि असम में हालिया एनआरसी प्रक्रिया में सूचीबद्ध 12 लाख हिंदुओं को सीएए के तहत भारतीय नागरिकता दी जाएगी लेकिन उन्होंने 1.5 लाख मुसलमानों के भाग्य के बारे में चिंता जताई।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तत्काल कार्रवाई से परिणाम नहीं मिल सकते हैं आत्मसंतुष्टि के प्रति आगाह किया और सरमा से सभी समुदायों के लिए निहितार्थ पर विचार करने का आग्रह किया। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को देशभर में लागू करने के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। हालांकि पश्चिम बंगाल और केरल सहित कई राज्यों ने अपने अधिकार क्षेत्र में कानून को लागू करने से इनकार कर दिया है जिससे विवाद छिड़ गया है। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कहा है कि चुनाव से पहले सीएए के प्रावधानों को अधिसूचित करने का केंद्र का कदम अस्थिर है और इससे देश में अशांति फैल सकती है।
लोकसभा चुनाव की घोषणा से ठीक पहले गृह मंत्रालय ने अधिसूचना जारी की। लोकसभा के पूर्व महासचिव पीडीटी आचार्य ने बताया कि राज्यों के पास संसद द्वारा पारित कानून को लागू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। राज्यों की शिकायतों के संबंध में उन्होंने कहा कि वे हमेशा उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं। संविधान के अनुसार राज्य सीएए को लागू करने से इनकार नहीं कर सकते क्योंकि नागरिकता राज्य सूची के नहीं बल्कि संघ सूची के अधिकार क्षेत्र में आती है जैसा कि संविधान के अनुच्छेद 246 के तहत वर्गीकृत है जो संसद और राज्य विधानसभाओं के बीच विधायी शक्तियों का वर्णन करता है।


