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Krishnanand Rai : साल 2005 और बीजेपी नेता कृष्णानंद राय की हत्या, फिर एक लंबा केस और सुबूत के अभाव में बरी मुख्तार

by | Mar 29, 2024 | अन्य, अपना यूपी, आपका जिला, क्राइम, ख़बर, टॉपिक, ट्रेंडिंग, देश, बड़ी खबर, मुख्य खबरें, राजनीति

Krishnanand Rai : बांदा जेल में बंद माफिया डॉन मुख्तार अंसारी की गुरुवार देर शाम दिल का दौरा पड़ने से मौत की खबर मिलते ही उन्नीस साल आठ महीने पहले भाजपा विधायक कृष्णानंद राय और सात अन्य पर हुए हमले की याद ताजा हो गई। बसनिया चट्टी पर दिसंबर की सर्द शाम जिले के लोगों के जेहन में गूंजती रही। एके-47 राइफलों से गोलियों की गूंज उतनी ही बेरहमी से गूंजी, जितनी उस भयावह दिन पर हुई थी। महीनों तक यह घटना देश भर में सुर्खियों में रही, जिसने न सिर्फ जिले बल्कि पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया।

29 नवंबर 2005 को विधायक कृष्णानंद राय (Krishnanand Rai) अपने विधानसभा क्षेत्र के कनुवान इलाके में एक क्रिकेट टूर्नामेंट का उद्घाटन करने जा रहे थे। दोपहर करीब 2:45 बजे, कोटवा रोड पर लथूडीह के पास, बसनिया गांव के करीब, राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों ने विधायक कृष्णानंद राय और सात अन्य लोगों पर घात लगाकर गोलियों की बौछार कर दी, जिससे उनकी जान चली गई। इस घटना के बाद ग़ाज़ीपुर, वाराणसी, मऊ और आज़मगढ़ सहित पूरे पूर्वांचल में शोक की लहर दौड़ गई।

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कुख्यात अपराधियों, हमलावरों ने हमले को अंजाम देने के लिए स्वचालित हथियारों का उपयोग करके अंधाधुंध गोलीबारी की। कृष्णानंद राय के शरीर को सड़सठ गोलियाँ छलनी कर गईं। इस हत्याकांड के सिलसिले में पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी, सांसद अफजाल अंसारी और अन्य पर भी आरोप लगाए गए थे, लेकिन सीबीआई कोर्ट ने अंसारी बंधुओं समेत उन्हें बरी कर दिया था। स्थिति यह थी कि विधायक की हत्या के बाद भी मोहम्मदाबाद गेट के अंदर कोई तलाशी नहीं ली गयी, जबकि अपराधियों के खिलाफ गाज़ीपुर, मोहम्मदाबाद और अन्य इलाकों में धरना, तोड़फोड़ और प्रदर्शन जारी रहा।

कृष्णानंद राय की हत्या के बाद पूर्वांचल में आक्रोश फूट पड़ा। बसों में आग लगा दी गई, सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया और बीजेपी नेताओं ने मुलायम सरकार के खिलाफ अभियान चलाया। हाई कोर्ट के आदेश के बाद जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। कृष्णानंद राय की पत्नी पूर्व विधायक अलका राय की याचिका पर केस दिल्ली ट्रांसफर कर दिया गया था, लेकिन सबूतों के अभाव में 3 जुलाई 2019 को दिल्ली की सीबीआई कोर्ट ने मुख्तार और अफजल समेत सभी को बरी कर दिया।

2007 में मुख्तार अंसारी और अफजाल अंसारी के खिलाफ मोहम्मदाबाद और करंडा थाने में केस दर्ज किया गया था। गैंग चार्ट में बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की हत्या, वाराणसी के कोयला कारोबारी और वीएचपी नेता नंद किशोर रूंगटा के अपहरण और हत्या से जुड़ी गैंगस्टर गतिविधियां शामिल थीं। इस मामले में 29 अप्रैल 2023 को एमपी/एमएलए कोर्ट ने मुख्तार को दस साल और उनके भाई बसपा सांसद अफजाल अंसारी को चार साल की सजा सुनाई थी। साथ ही जुर्माना भी लगाया गया।

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