UP Lok Sabha Election : उत्तर प्रदेश की सियासत में बाहुबल के दम पर हार जीत दिलाने वाले बाहुबली नेता भी लोकसभा चुनाव में इस बार कोई करिश्मा नहीं कर पाए। बाहुबलियों का साथ बीजेपी के लिए तो घाटे का सौदा ही साबित हुआ। वह फिर चाहे धनंजय सिंह का साथ हो या अभय सिंह का साथ हो। यहां तक की राज्यसभा चुनाव में मन की आवाज सुनकर भाजपा के लिए वोट करने वाले राजा भैया भी लोकसभा चुनाव में भाजपा के बजाय सपा के लिए ही लाभदायक साबित हुए।
इस चुनाव में राजा भैया को छोड़कर कोई भी बाहुबली अपना असर नहीं डाल पाया। दूसरी तरफ बाहुबली बृजभूषण शरण सिंह को छोड़कर कोई भी बाहुबली बीजेपी की झोली में जीत नहीं डाल सका।
इन नेताओं का नहीं चल पाया कोई जादू
हर चुनाव में धनंजय सिंह, अभय सिंह, बृजेश सिंह, राजा भैया, बृज भूषण शरण सिंह इन सब नेताओं पर हर किसी की नजर रहती है। यह माना जाता है कि ये सभी यूपी के हर चुनाव में हार और जीत तय करते हैं। बृजेश सिंह, बृज भूषण शरण सिंह तो पहले से ही बीजेपी के खेमे में थे। मगर इस बार इन सबका कोई जादू नहीं चल पाया।
राकेश प्रताप सिंह, राकेश पांडे भी बीजेपी और राम मंदिर के लिए बयानबाजी करने लगे और बीजेपी के करीबी बन गए। दूसरी ओर जौनपुर में अंतिम में धनंजय सिंह ने भी बीजेपी को ही अपना समर्थन दे दिया। हालांकि लोकसभा चुनाव में धनंजय सिंह, अभय सिंह, बृजेश सिंह, इस बार कोई करिश्मा नहीं कर पाए। धनंजय सिंह के प्रभाव वाली जौनपुर और मछलीशहर लोक सभा सीट भाजपा हार गई। तो वहीं अभय सिंह के प्रभाव वाली फैजाबाद और अंबेडकरनगर लोकसभा सीट पर भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। यहां तक की बृजेश सिंह के प्रभाव वाली चंदौली लोकसभा सीट से तो खुद केंद्रीय मंत्री महेंद्र नाथ पांडे चुनाव हार गए।
बृजभूषण शरण सिंह ने बचाया सिर्फ अपना किला
रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के साथ राज्यसभा में हुई बीजेपी की दोस्ती, लोकसभा चुनाव आते-आते खत्म हो गई। रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने वैसे इस बार तो खुलकर किसी भी दल का समर्थन नहीं किया। मगर उनके कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने खुलेआम समाजवादी पार्टी को चुनाव लड़ाया। इसका असर ये रहा कि प्रतापगढ़ और कौशांबी सीट पर राजा भैया का सिक्का चला और बीजेपी ने ये दोनों ही सीट गंवा दी।


