कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने बजट 2024 में सरकार द्वारा घोषित रोजगार-जुड़े प्रोत्साहन (ईएलआई) पर सवाल उठाते हुए कहा है कि लाभार्थियों के अनुमानित आंकड़े “अत्यधिक अतिरंजित” हैं।
निजी मीडिया से बात करते हुए चिदंबरम ने कहा कि उन्हें विश्वास नहीं है कि सरकार एक साल में दो करोड़ नौकरियां पैदा कर पाएगी, जैसा कि बजट में कहा गया है।
उन्होंने आगे कहा, “मैं इन आंकड़ों पर विश्वास नहीं करता। 210 लाख, 30 लाख, 50 लाख, कुल मिलाकर 290 लाख। मुझे लगता है कि यह एक और जुमला है। जैसा कि उन्होंने कहा कि वे हर साल दो करोड़ नौकरियां पैदा करेंगे। मैं इस पर विश्वास नहीं करता।”
रोजगार से जुड़ी तीन योजनाओं की घोषणा
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में रोजगार से जुड़ी तीन योजनाओं की घोषणा की । इनमें से एक योजना कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) में पंजीकृत पहली बार नौकरी करने वाले लोगों के लिए है और इसमें 15,000 रुपये तक की राशि दी जाती है। वित्त मंत्री ने कहा कि यह योजना 1 लाख रुपये प्रति माह तक कमाने वाले युवा पेशेवरों का समर्थन करेगी और इससे 210 लाख युवाओं को लाभ होगा।
चिदंबरम ने कहा कि यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कितनी औद्योगिक इकाइयों, उद्यमों और व्यवसायों को इस योजना के अंतर्गत लाया जाता है।
उन्होंने कहा, “मैं वास्तविक भर्ती देखना चाहता हूं और उसके बाद ही मैं इन आंकड़ों पर विश्वास करूंगा। ये बहुत बढ़ा-चढ़ाकर बताए गए आंकड़े हैं। अचानक, वे 290 लाख नौकरियों पर कैसे पहुंच गए?”
पूर्व वित्त मंत्री ने आगे कहा
पूर्व वित्त मंत्री ने आगे कहा कि सरकार ने इस बजट में अंततः स्वीकार किया है कि बेरोजगारी और मुद्रास्फीति चिंता के विषय हैं, जिनका उल्लेख कांग्रेस के चुनाव घोषणापत्र में प्रमुखता से किया गया था।
उन्होंने कहा, “हम पिछले कई वर्षों से यह कहते आ रहे हैं। बेरोजगारी सबसे बड़ी चुनौती है और मुद्रास्फीति दूसरी। मुझे खुशी है कि सरकार ने आखिरकार, हालांकि देर से ही सही, इसे स्वीकार कर लिया है, क्योंकि उन्हें (लोकसभा) चुनाव में सबक मिल गया है।


