SC-ST Reservation : बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में SC-ST आरक्षण में क्रीमीलेयर के लागू होने को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आश्वासन से समस्या का समाधान नहीं होगा और केंद्र सरकार को संसद का विशेष सत्र बुलाकर आरक्षण की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर ठीक से नहीं की पैरवी
मायावती ने आगे कहा कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर ठीक से पैरवी नहीं की, जिससे अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण पर संकट गहरा गया है। उन्होंने कहा कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों ने इस महत्वपूर्ण मुद्दे को संसद में सही तरीके से नहीं उठाया, जिससे देश के करोड़ों SC-ST समुदाय के लोग अपने आपको ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
केंद्र सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग
बसपा सुप्रीमो ने सुप्रीम कोर्ट के 1 अगस्त के फैसले पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि केवल आश्वासन देने से काम नहीं चलेगा। अगर प्रधानमंत्री की नीयत साफ है, तो उन्हें संसद का सत्र स्थगित करने के बजाय एक विशेष सत्र बुलाकर आरक्षण की पूरी तस्वीर को स्पष्ट करना चाहिए।
मायावती ने इस बात पर भी जोर दिया कि केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद संसद में एक बिल लाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां आरक्षण के खिलाफ हैं और नौकरियों को खत्म कर संविदा पर कर्मचारियों की तैनाती आरक्षण को खत्म करने की साजिश है। मायावती ने कहा कि एससी-एसटी के लोग क्रीमीलेयर के बहाने आरक्षण को खत्म करने की कोशिशों से खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
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