Kolkata High Court : पश्चिम बंगाल के एक सरकारी अस्पताल में महिला डॉक्टर के साथ हुई दुष्कर्म और हत्या ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कोलकाता हाई कोर्ट ने इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी है। कोलकाता पुलिस से मामले की जांच का पूरा विवरण लेकर, सीबीआई की वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम ने दिल्ली से कोलकाता पहुंचकर अपनी जांच शुरू कर दी है।
सीबीआई की जांच में तेजी
सीबीआई की टीम में स्वास्थ्य और फोरेंसिक विशेषज्ञ भी शामिल हैं, जो इस मामले के हर पहलू की बारीकी से जांच कर रहे हैं। जांच एजेंसी ने कोलकाता पुलिस से आरोपियों और गवाहों के बयान समेत सभी दस्तावेज ले लिए हैं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हुए चौंकाने वाले खुलासे
इस मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट से चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। कुछ छात्रों ने दावा किया है कि रिपोर्ट से पता चलता है कि पीड़िता के साथ कई लोगों ने दुष्कर्म किया था। डॉक्टर सुबर्ण गोस्वामी ने कहा, “यह किसी एक व्यक्ति का काम नहीं है। पीड़िता का गैंगरेप किया गया था।” उन्होंने यह भी बताया कि पीड़िता के पैर 90 डिग्री अलग-अलग थे, जो इस बात की ओर इशारा करते हैं कि पेल्विक गर्डल टूट चुका था।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
कोलकाता हाई कोर्ट ने शहर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। अदालत ने पुलिस से पूछा कि उन्होंने इस घटना को केवल ‘अप्राकृतिक मौत’ का मामला क्यों माना और संदीप घोष जैसे प्रमुख गवाह का बयान लेने में देरी क्यों की। अदालत ने शहर पुलिस को शाम तक मामले का संपूर्ण विवरण सीबीआई को सौंपने के निर्देश दिए थे।
डॉक्टरों की हड़ताल और विरोध
इस जघन्य घटना के बाद फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (FORDA) ने अपनी अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया था, लेकिन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा द्वारा उनकी मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन देने के बाद उन्होंने हड़ताल वापस ले ली। हालांकि, फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने घोषणा की है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे अपनी हड़ताल जारी रखेंगे।
भाजपा का ममता सरकार पर आरोप
भाजपा नेता अमित मालवीय ने इस मामले को लेकर ममता बनर्जी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और कोलकाता पुलिस इस मामले को दबाने की कोशिश कर रही हैं। मालवीय ने दावा किया कि आरजी कर मेडिकल कॉलेज प्राधिकरण ने घटना स्थल पर मरम्मत कार्य शुरू कराया है, जो अहम सबूतों को नष्ट करने की कोशिश हो सकती है। उन्होंने इसे सरकार की छवि को बचाने का प्रयास बताया और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
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