IC 814 The Kandahar Hijack : इन दिनों विवादों में है, और इसके बहिष्कार की मांग बढ़ रही है। आरोप है कि इस सीरीज में 1999 के विमान अपहरण की घटना में शामिल आतंकवादियों की असली पहचान छिपाई गई है। इस सीरीज का निर्देशन अनुभव सिन्हा ने किया है और यह 24 दिसंबर 1999 को काठमांडू से उड़ान भरने के 40 मिनट बाद भारतीय विमान के अपहरण की घटना पर आधारित है। यह वेब सीरीज 29 अगस्त से नेटफ्लिक्स पर प्रसारित हो रही है। आरोप है कि निर्माताओं ने समुदाय विशेष से संबंधित आतंकवादियों के नाम बदल दिए हैं और उन्हें शंकर और भोला के नाम से पेश किया है।
आईसी-814 के अपहरण की साजिश पाकिस्तान के रावलपिंडी GHQ में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी द्वारा रची गई थी। इसका उद्देश्य भारत सरकार को हरकत-उल-अंसार के महासचिव मसूद अजहर को जम्मू जेल से रिहा करने के लिए मजबूर करना था। इससे पहले 15 जुलाई 1999 को कोट बलवाल में जेलब्रेक के दौरान अजहर का साथी कमांडर सज्जाद अफगानी मारा जा चुका था। मसूद अजहर के भाई मोहम्मद इब्राहिम अतहर अल्वी को डर था कि भारतीय खुफिया एजेंसियां उसे भी खत्म कर देंगी। इस कारण उसने काठमांडू में ISI नेटवर्क का उपयोग करके अपहरण की साजिश रची।
भारतीय खुफिया विभाग को इस हाईजैकिंग प्लान के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली थी। आईसी-814 फ्लाइट में रॉ ऑपरेटिव पहले से मौजूद था, जो मई 2022 में रिटायर हुआ था। विमान ने काठमांडू के त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरी, जिसमें अधिकांश यात्री भारतीय थे, जो दिल्ली आ रहे थे। भारतीय वायुसीमा में प्रवेश करते ही हाईजैकर्स ने विमान को कब्जे में ले लिया और पायलट और यात्रियों पर बंदूकें तान दीं। इसके बाद विमान को दिल्ली से पाकिस्तान की ओर मोड़ दिया गया। विमान में इतना ईंधन नहीं था कि उसे अफगानिस्तान ले जाया जा सके, इसलिए इसे अमृतसर से लाहौर की ओर मोड़ा गया। अगले दिन, विमान लाहौर से दुबई होते हुए अफगानिस्तान के कंधार पहुंचा।
हाईजैकर्स ने अपनी मांगें रखनी शुरू कर दीं, जिनमें भारतीय जेलों में बंद आतंकवादियों की रिहाई और 200 मिलियन अमेरिकी डॉलर की फिरौती शामिल थी। उन्होंने भारत में बंद 36 आतंकवादियों की रिहाई की मांग की, जिसमें मसूद अजहर भी शामिल था। भारत सरकार हाईजैकर्स के साथ बातचीत में लगी रही और तत्कालीन विदेश मंत्री जसवंत सिंह तीन आतंकियों – मुश्ताक अहमद जरगर, अहमद उमर सईद शेख और मौलाना मसूद अजहर को कंधार लेकर गए। मसूद अजहर ने बाद में जैश-ए-मोहम्मद आतंकी संगठन बनाया, जो 2019 पुलवामा हमलों में शामिल था।


