Ramlila 2024 : विजयदशमी का महापर्व 12 अक्टूबर को मनाया जाने वाला है, और इसके लिए तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इस साल की खास बात यह है कि लाटभैरव की रामलीला में इकोफ्रेंडली रावण का निर्माण किया जा रहा है, जिसे बरेका में 75 फीट और रामनगर में 60 फीट की ऊंचाई में प्रस्तुत किया जाएगा।
इस पर्व की विशेषता है कि हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय एक साथ मिलकर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले तैयार करते हैं। मुस्लिम परिवारों द्वारा बनाए गए इन पुतलों का दहन असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक माना जाता है।
इकोफ्रेंडली रावण का दहन
लाटभैरव रामलीला (Ramlila 2024) के प्रधानमंत्री और वरिष्ठ अधिवक्ता कन्हैयालाल यादव के अनुसार, इस बार 70 फीट का इकोफ्रेंडली रावण का निर्माण किया जा रहा है। खास बात यह है कि लंका दहन के समय इको फ्रेंडली आतिशबाजी का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे प्रदूषण में कमी आएगी। इस बार लंका दहन के दृश्य को और भी आकर्षक बनाने के लिए लंका के आगे दो द्वारपाल होंगे, और हनुमान जी पूरी लंका को जलाते हुए सीता मां को लेकर बाहर निकलेंगे।
खानदानी परंपरा का निर्वहन
अंबिया मंडी के इश्तियाक अहमद, जो तीन पीढ़ियों से रावण के पुतले बनाने का कार्य कर रहे ने बताया कि यह उनके खानदानी काम का हिस्सा है। एक पुतला तैयार करने में लगभग एक सप्ताह का समय लगता है और इसकी लागत 15 से 20 हजार रुपये होती है। उनके परिवार की मेहनत से तीन महीने में दो दर्जन से ज्यादा पुतले तैयार होते हैं, जो वाराणसी और पूर्वांचल के अन्य जिलों में भेजे जाते हैं।
रामनगर और बरेका में विशाल पुतले
रामनगर में, 60 फीट ऊंचा रावण का पुतला तैयार किया जा रहा है, जिसे पीढ़ियों से किया जा रहा है। राजू खान, जो इस काम में जुटे हुए हैं, ने बताया कि उनके परिवार की परंपरा का आरंभ परदादा हाजी अली हुसैन ने किया था।
बरेका में, शमशाद का परिवार 75 फीट ऊंचा रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतले तैयार कर रहा है। यह परिवार चार पीढ़ियों से इस परंपरा को जीवित रखे हुए है और डेढ़ महीने पहले से ही इस कार्य में जुट जाता है।
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