राजनीति

अपना यूपी

क्राइम

बड़ी खबर

स्पोर्ट्स

वेब स्टोरीज

खबर

Sehore News : सीहोर की झरखेड़ा पंचायत में भ्रष्टाचार का मामला पहुंचा पीएमओ, कर दी ये बड़ी मांग

by | Oct 16, 2024 | देश, बड़ी खबर, मुख्य खबरें

Sehore News : भोपाल के पास सीहोर जिले में स्थित झरखेड़ा ग्राम पंचायत में पूर्व सरपंच और सचिव से जुड़े भ्रष्टाचार का मामला प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) तक पहुंच गया है। आरटीआई कार्यकर्ता अजय पाटीदार ने पीएमओ में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोपियों के साथ ही सीहोर जिले की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नमिता बघेल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

अपनी शिकायत में पाटीदार ने आरोप लगाया है कि पूर्व सरपंच सविता विश्वकर्मा ने अपने पति सुरेश विश्वकर्मा और सचिव मनोहर सिंह मेवाड़ा के साथ मिलकर सरकारी स्कूल की जमीन पर बिना अनुमति के दुकानें बनवाईं। बताया जा रहा है कि उन्होंने पूरी राशि पंचायत के खाते में जमा कराए बिना इन दुकानों को बेचकर भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताएं कीं। जिला स्तरीय जांच के बाद जिला पंचायत सीईओ ने पूर्व सरपंच और सचिव के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए जनपद पंचायत सीहोर को पत्र भेजा है। हालांकि, सीईओ नमिता बघेल ने कोई एफआईआर दर्ज नहीं कराई है, जिससे पता चलता है कि वे आरोपियों को संरक्षण दे रही हैं।

जांच में सरपंच के पति सुरेश विश्वकर्मा को एक महत्वपूर्ण आरोपी पक्ष के रूप में पहचाना गया है। उनके खिलाफ सबूत होने के बावजूद, जिला पंचायत ने उन्हें आरोपी के रूप में सूचीबद्ध नहीं किया, क्योंकि उन्होंने सविता विश्वकर्मा के कार्यकाल के दौरान सरपंच की जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से संभाला था। जांच में पता चला है कि दुकानों की बिक्री से पैसे की अवैध वसूली भी सुरेश विश्वकर्मा द्वारा की गई थी।

इसमें शामिल वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की गंभीर प्रकृति को देखते हुए, पाटीदार ने उच्च अधिकारियों से मामले का संज्ञान लेने और प्रमुख सचिव स्तर पर एफआईआर दर्ज करने का आग्रह किया है। उन्होंने आरोपियों को कथित रूप से संरक्षण देने के लिए सीईओ नमिता बघेल के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की है।

वर्ष 2022 में झारखेड़ा ग्राम पंचायत ने नियमों और वित्तीय प्रोटोकॉल का उल्लंघन करते हुए 17 दुकानों का निर्माण किया। एफआईआर दर्ज करने के निर्देश के बावजूद, जिम्मेदार पक्ष चुप रहे। जांच के दौरान दुकान खरीदने वालों ने पूर्व सरपंच और सचिव पर गंभीर आरोप लगाए। स्थानीय निवासी कैलाश चंद्र ने बताया कि उन्होंने नीलामी में 286,000 रुपये में दुकान खरीदी, लेकिन उन्हें केवल 65,000 रुपये की रसीद मिली। एक अन्य ग्रामीण मुलीबाई ने 108,000 रुपये नकद दिए, लेकिन उन्हें केवल 45,000 रुपये की रसीद मिली, जबकि जगदीश विश्वकर्मा ने बताया कि उन्होंने दुकान के लिए 100,000 रुपये का भुगतान किया, लेकिन उन्हें केवल 45,000 रुपये की रसीद मिली। ग्रामीणों की इसी तरह की रिपोर्ट से पता चलता है कि खरीदारों से दर्ज राशि से अधिक पैसे लिए गए, और ग्राम पंचायत कार्यालय के रिकॉर्ड से विवरण गायब है।

येे भी पढ़ें : UP News : यूपी सरकार का नया कानून, खाद्य पदार्थों की पवित्रता को सुनिश्चित करने की नई पहल

ये भी देखें : दिल्ली में इस साल भी लगा पटाखों पर बैन, Delhi Government ने जारी किया आदेश

अपना यूपी

क्राइम

आपका जिला

वीडियो

ट्रेंडिंग

बड़ी खबर