UP News : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को इंदिरानगर में आयोजित सिल्क एक्सपो का उद्घाटन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने रेशम उद्योग के विकास के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को व्यक्त करते हुए कहा कि बजट में इस क्षेत्र के लिए 40 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि एक हैक्टेयर में रेशम की खेती करने वाले किसानों की आय एक से दो लाख रुपये तक हो रही है, जो इस उद्योग के विकास की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है। उन्होंने कहा, रेशम विकास में उत्तरोत्तर सुधार हो रहे हैं और सरकार इस क्षेत्र को और भी सशक्त बनाने के लिए प्रयासरत है।
मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने इस मौके पर कहा कि उत्तर प्रदेश में रेशम उत्पादन 100 मीट्रिक टन से बढ़कर 700 मीट्रिक टन हो चुका है। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में रेशम की खपत 4000 मीट्रिक टन तक पहुंच गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मांग का केवल 20 प्रतिशत ही यहां का उत्पादन पूरा कर पा रहा है। उन्होंने इस मांग को पूरा करने के लिए उत्पादन बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
75 से अधिक उत्पादों को जीआई टैग की हुई प्राप्त
बनारसी साड़ी समेत (UP News) अन्य रेशम उत्पादों के लिए प्रदेश में सस्ता कच्चा माल उपलब्ध होता है, तो इसका विकास निश्चित रूप से तेजी से होगा। सरकार ने “एक जिला एक उत्पाद” नामक नई पॉलिसी के माध्यम से पारंपरिक उत्पादों को उत्पादन, पैकेजिंग, मार्केटिंग और डिजाइनिंग के साथ जोड़ा है। यूपी देश का पहला राज्य है जिसने इस दिशा में कदम बढ़ाया है, और यहां 75 से अधिक उत्पादों को जीआई टैग भी प्राप्त हुआ है।
हालांकि, पिछली सरकारों (UP News) की उपेक्षा के कारण यूपी के पारंपरिक उत्पादों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। लेकिन आज विभिन्न जिलों के विशिष्ट उत्पाद ग्लोबल प्लेटफार्म पर यूपी की पहचान को मजबूत कर रहे हैं। सिल्क क्लस्टर का विकास यूपी में किया जाएगा, और रेशम किसानों को रेशम मित्र के रूप में मान्यता दी जाएगी। सरकार इस दिशा में हर संभव सहायता प्रदान करेगी। प्रधानमंत्री मित्र पार्क इन संभावनाओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। हालांकि रेशम का उत्पादन पारंपरिक तकनीक पर आधारित है, लेकिन समय के साथ खुद को बदलना भी आवश्यक है। अब चरखा भी इलेक्ट्रिक हो चुका है, और रेशम उत्पादों को प्रोसेसिंग से जोड़ने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लेना पड़ेगा।


