Kalyan Banerjee : मंगलवार को वक्फ बिल पर हुई संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की बैठक में हंगामे की स्थिति उत्पन्न हो गई। टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी और बीजेपी सांसद अभिजीत गंगोपाध्याय के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसने स्थिति को इतना बढ़ा दिया कि बनर्जी ने टेबल पर रखी कांच की पानी की बोतल फोड़ दी। इस घटना में उनके हाथ में गंभीर चोट लगी, जिसके चलते उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा, जहां उन्हें चार टांके लगे।
घटना का विवरण
यह हंगामा उस समय शुरू हुआ जब ओडिशा पर एक प्रेजेंटेशन चल रहा था और कल्याण बनर्जी बिना बारी के बोलने की कोशिश कर रहे थे। उन्हें इससे पहले तीन बार बोलने का मौका मिल चुका था, लेकिन वह प्रेजेंटेशन के दौरान दोबारा बोलने की इच्छा व्यक्त कर रहे थे। इस पर अभिजीत गंगोपाध्याय ने आपत्ति जताई, जिसके परिणामस्वरूप दोनों के बीच गर्मागर्म बहस छिड़ गई। सूत्रों के अनुसार, बनर्जी ने गंगोपाध्याय के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया, जिसके बाद दोनों में तीखी बहस शुरू हो गई।
अचानक, कल्याण बनर्जी ने गुस्से में आकर कांच की बोतल को मेज पर पटक दिया, जिससे वह खुद ही घायल हो गए। घायल होने के बाद, आप सांसद संजय सिंह और AIMIM सांसद ओवैसी ने उन्हें इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया।
निलंबन की प्रक्रिया
बैठक के दौरान हंगामे के चलते कल्याण बनर्जी को जेपीसी से एक दिन के लिए निलंबित कर दिया गया। जेपीसी के चेयरमैन जगदंबिका पाल के नेतृत्व में रूल 374 के तहत वोटिंग हुई, जिसमें निलंबन के पक्ष में 9 और विपक्ष में 7 वोट पड़े। यह निर्णय सत्ता पक्ष के सदस्यों द्वारा लिया गया, लेकिन बाद में बातचीत के परिणामस्वरूप केवल एक दिन के लिए सस्पेंड करने का निर्णय हुआ। अगली बैठक 28 और 29 नवंबर को होगी, जिसमें वक्फ संशोधन विधेयक पर विचार-विमर्श जारी रहेगा।
वक्फ संशोधन विधेयक पर विवाद
वक्फ संशोधन विधेयक पर देश की सियासत में गरमा-गर्मी बनी हुई है। मोदी सरकार ने 8 अगस्त को लोकसभा में दो विधेयक, वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 और मुसलमान वक्फ (खात्मा) विधेयक 2024, पेश किए थे। सरकार का दावा है कि इन विधेयकों का उद्देश्य वक्फ बोर्ड के कामकाज में सुधार लाना और वक्फ संपत्तियों का कुशल प्रबंधन सुनिश्चित करना है। हालांकि, विपक्ष ने कुछ प्रावधानों पर कड़ी आपत्ति जताई है, जिसके बाद इसे आगे की जांच के लिए संसद की संयुक्त समिति को भेजा गया है।
जेपीसी का महत्व
संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) का गठन संसद के कामकाज में पारदर्शिता और गहराई लाने के लिए किया जाता है। यह एक ऐसी एजेंसी है, जिस पर पूरे सदन को भरोसा होता है। जेपीसी का मुख्य उद्देश्य किसी बिल या सरकारी गतिविधियों में वित्तीय अनियमितताओं की जांच करना है। इसकी आवश्यकता इसलिए होती है क्योंकि संसद के पास कामों की अधिकता होती है और सीमित समय में गहराई से विचार करना संभव नहीं होता।
जेपीसी का गठन दोनों सदनों के सदस्य मिलकर करते हैं, और यह संसदीय अध्यक्ष के निर्देश पर काम करती है। जेपीसी अपनी रिपोर्ट संसद या स्पीकर को सौंपती है, ताकि सदन में महत्वपूर्ण मामलों पर उचित निर्णय लिया जा सके।
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