UP Air Pollution : उत्तर प्रदेश के आसपास क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) आज अत्यधिक खराब स्तर पर पहुंच चुका है। लखनऊ में तालकटोरा क्षेत्र में AQI 239, जबकि केंद्रीय विद्यालय क्षेत्र में 200 दर्ज किया गया। आगरा, बरेली और अन्य शहरों में भी AQI स्तर चिंताजनक है। ऐसे में सांस, दमा, अस्थमा, टीबी और सीओपीडी के मरीजों के लिए आने वाले दिन बेहद खतरनाक हो सकते हैं।
प्रदूषण के स्वास्थ्य पर प्रभाव
विशेषज्ञों का कहना है कि AQI स्तर 101 से 200 तक ‘अच्छी स्थिति’ नहीं मानी जाती है। ऐसे में फेफड़ों, दिल और अस्थमा के मरीजों को सांस लेने में कठिनाई हो सकती है। 201 से 300 के बीच AQI को ‘खराब’ माना जाता है, और 401 से 500 तक के स्तर पर तो सामान्य लोगों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। आने वाले दिनों में प्रदूषण में वृद्धि के साथ, धनतेरस से गोवर्धन पूजा तक यह स्थिति बनी रह सकती है, जिसके बाद भी इसका असर कम नहीं होगा।
ब्रोंकाइटिस और अन्य सांस संबंधी बीमारियों का खतरा
धूल और अन्य रासायनिक कणों के संपर्क में आने से ब्रोंकाइटिस का खतरा बढ़ जाता है। यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब कोई पहले से बीमार हो। ऐसे में खांसी, सांस लेने में कठिनाई और घरघराहट जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इसे गंभीरता से लेना जरूरी है, क्योंकि लंबे समय तक ऐसे वातावरण में रहने से हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है।
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आगरा में प्रदूषण की स्थिति
आगरा के दयालबाग और शास्त्रीपुरम जैसे इलाकों में प्रदूषण की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। यहां पीएम 2.5 के कणों का स्तर 322 माइक्रोग्राम प्रति मीटर तक पहुंच गया है, जिसे ‘वेरी पुअर’ श्रेणी में रखा गया है। ऐसे में यहां सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है।
बचाव के उपाय
- मास्क पहनें: घर से बाहर निकलने पर एन-95 या थ्री लेयर सर्जिकल मास्क का उपयोग करें। कपड़े या चुन्नी से बचाव नहीं होगा।
- घर के अंदर सफाई: यदि घर में साफ-सफाई की जा रही है, तो भी मास्क पहनें।
- बाहर जाने से बचें: जब भी संभव हो, घर के अंदर रहें और खुली हवा में जाने से बचें।


