Gorakhpur : समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गोरखपुर नगर निगम की आउटसोर्सिंग भर्ती प्रक्रिया को लेकर भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर एक ट्वीट कर इसे आरक्षण खत्म करने और पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के खिलाफ साजिश करार दिया।
अखिलेश यादव का आरोप
अखिलेश यादव ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि भाजपा सरकार पूरी सरकार को ही आउटसोर्सिंग पर दे दे, तो उनका कमीशन भी सेट हो जाएगा। फुटकर में नौकरी और आरक्षण खत्म करने का महाकष्ट नहीं उठाना पड़ेगा। उन्होंने इस भर्ती प्रक्रिया को आरक्षण विरोधी बताते हुए भाजपा पर आरक्षण खत्म करने की साजिश का आरोप लगाया है।
गोरखपुर नगर निगम की सफाई
गोरखपुर (Gorakhpur) नगर निगम के अपर नगर आयुक्त निरंकार सिंह ने अखिलेश यादव के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि:
- सेवानिवृत्त अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति:
- कार्य की अधिकता के कारण सेवानिवृत्त तहसीलदार, नायब तहसीलदार, और लेखपाल को प्रतिनियुक्ति पर रखा जाता है।
- यह प्रक्रिया कोई नई नहीं है और पहले भी (2012 से) ऐसी नियुक्तियां होती रही हैं।
- परमानेंट पोस्टिंग नहीं:
- यह स्थायी भर्ती नहीं है, बल्कि मानदेय आधारित व्यवस्था है।
- इन नियुक्तियों पर आरक्षण लागू नहीं होता।
- कार्य अनुभव का लाभ:
- इन पदों पर काम करने वाले सेवानिवृत्त अधिकारी भूमि पैमाइश और संपत्ति सुरक्षा जैसे तकनीकी कार्यों में अनुभव रखते हैं।
- इनकी मदद से योजनाओं का सुचारु क्रियान्वयन होता है।
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भर्ती प्रक्रिया पर राजनीतिक गर्मी
अखिलेश यादव के ट्वीट के बाद भाजपा और सपा के बीच सियासी बहस तेज हो गई है।
- भाजपा ने इसे सपा की “गलत जानकारी और भ्रामक राजनीति” का हिस्सा बताया।
- सपा ने इस प्रक्रिया को “पीडीए के खिलाफ और आरक्षण विरोधी” बताते हुए इसे भाजपा सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े करने का जरिया बना लिया है।
विशेषज्ञों की राय
- आरक्षण की बहस:
- अगर यह मानदेय आधारित प्रक्रिया है और सेवानिवृत्त अधिकारियों को नियुक्त किया जा रहा है, तो आरक्षण के दायरे में इसे लाना संभव नहीं है।
- राजनीतिक मुद्दा:
- यह मामला आगामी चुनावों के मद्देनजर आरक्षण और पिछड़े वर्गों के मुद्दों को भुनाने की कोशिश भी हो सकता है।


