Sambhal : संभल में हुई हिंसा के मामले में समाजवादी पार्टी (सपा) का 12 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल सोमवार को स्थिति का जायजा लेने के लिए वहां जाने वाला था। यह टीम नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे के नेतृत्व में हिंसा प्रभावित इलाके का दौरा कर एक रिपोर्ट तैयार कर सपा प्रमुख अखिलेश यादव को सौंपने वाली थी। हालांकि, स्थानीय प्रशासन ने हालात सामान्य न होने का हवाला देते हुए इस दौरे को रोक दिया।
प्रशासन की रोक और डीजीपी से वार्ता
माता प्रसाद पांडे ने बताया कि प्रशासन की रोक के कारण प्रतिनिधिमंडल को दौरा स्थगित करना पड़ा। उन्होंने डीजीपी से फोन पर बात की, जिसमें डीजीपी ने उन्हें तीन दिन बाद दौरा करने की अनुमति देने का आश्वासन दिया। साथ ही, निष्पक्ष जांच का वादा भी किया गया।
माता प्रसाद पांडे ने आरोप लगाया कि प्रशासन अपनी कमियों को छुपाने के लिए सपा के प्रतिनिधिमंडल को रोक रहा है। उन्होंने कहा कि सपा वहां जाकर सरकार के “षड्यंत्र” का पर्दाफाश करना चाहती थी लेकिन प्रशासन इसे रोकने का प्रयास कर रहा है।
सपा नेताओं पर लगे आरोपों का खंडन
सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क और विधायक के बेटे सोहेल इकबाल पर हिंसा भड़काने के आरोप लगाए गए हैं। माता प्रसाद पांडे ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सपा नेताओं की कोई साजिश नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार समस्या का समाधान करने के बजाय विपक्ष को बदनाम करने की कोशिश कर रही है।
ये भी पढें : 26 Nov Ka Panchang : आज के पंचांग से जानें शुभ-अशुभ समय
ये भी देखें : BSP supremo Mayawati का बड़ा ऐलान, EVM में धांधली के कारण बसपा नहीं लड़ेगी कोई उपचुनाव
हिंसा और मौतों पर प्रतिक्रिया
संभल (Sambhal) हिंसा में चार लोगों की मौत के मामले पर माता प्रसाद पांडे ने कहा कि घटना में 315 बोर के हथियार से गोली चलने की बात सामने आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस दो प्रकार के असलहे रखती है और स्थिति को स्पष्ट करने में विफल रही है।
प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
माता प्रसाद पांडे ने कहा कि यह सरकार अधिनायकवादी रवैया अपनाती है और संवेदनशील मुद्दों पर उचित कार्रवाई करने में विफल रहती है। उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी की कोई भी कार्रवाई समाज में शांति और सच्चाई लाने के उद्देश्य से होती है लेकिन सरकार इसे रोकने का प्रयास करती है।


