Jhansi Medical College : झांसी मेडिकल कॉलेज के एनआईसीयू में 15 नवंबर को हुए भीषण अग्निकांड के बाद डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के आदेश पर कठोर कार्रवाई की गई है। कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. नरेंद्र सिंह सेंगर को उनके पद से हटा दिया गया है। साथ ही, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सचिन माहुर, एनआईसीयू वार्ड की सिस्टर इंचार्ज संध्या राय और अवर अभियंता (विद्युत) संजीत कुमार को निलंबित कर आरोप पत्र दिया गया है।
18 मासूमों की जान गई
इस भीषण अग्निकांड में अब तक 18 नवजातों की मौत हो चुकी है। हादसे के समय एनआईसीयू में 49 नवजात भर्ती थे, जिनमें से 39 को रेस्क्यू किया गया। हालांकि, इनमें से आठ बच्चों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। मेडिकल प्रशासन का दावा है कि इन बच्चों की मौत बीमारियों के कारण हुई, न कि आग की घटना से।
जांच रिपोर्ट के बाद कार्रवाई
डिप्टी सीएम द्वारा गठित चार सदस्यीय जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। हटाए गए प्रधानाचार्य डॉ. नरेंद्र सिंह सेंगर को चिकित्सा शिक्षा विभाग के महानिदेशालय से संबद्ध किया गया है। डीएम ने इस मामले की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए हैं, जो जल्द शुरू होगी।
पीड़ित परिवारों को मुआवजा और राहत
डीएम ने सभी पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बचाए गए बच्चों की देखभाल के लिए विशेष ध्यान दिया जा रहा है। दो बच्चे अभी भी निजी अस्पताल में इलाजरत हैं, जबकि अन्य को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
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क्या हुआ था?
15 नवंबर की रात मेडिकल कॉलेज के एनआईसीयू में आग लगने से 10 नवजात जिंदा जल गए थे। उस समय 49 नवजात भर्ती थे। आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया गया। घटना के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन और व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए, जिसके चलते यह सख्त कार्रवाई हुई।
मजिस्ट्रीयल जांच के निर्देश
डीएम के निर्देश पर मजिस्ट्रेटी जांच के लिए एक टीम गठित की जाएगी। एडीएम वरुण पांडे ने बताया कि घटना के सभी पहलुओं की जांच की जाएगी, और लापरवाही के दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।


