Sambhal : संभल में जामा मस्जिद को लेकर चल रहे विवाद और उससे उपजी हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अहम आदेश दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि ट्रायल कोर्ट 8 जनवरी तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शांति और कानून व्यवस्था (Sambhal) को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसके साथ ही अदालत ने मस्जिद सर्वे रिपोर्ट को फिलहाल सार्वजनिक न करने का भी निर्देश दिया और याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट जाने को कहा।
यूपी सरकार के डिप्टी सीएम की प्रतिक्रिया
केशव प्रसाद मौर्य
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत करते हुए समाजवादी पार्टी और हिंसा में शामिल लोगों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। सपा के गुंडों और दंगाइयों से कहना चाहता हूं कि माहौल खराब न करें। पुलिस और प्रशासन दंगाइयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगा।
ब्रजेश पाठक
दूसरे डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि हम माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करेंगे। किसी को भी कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी। जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। राज्य सरकार और प्रशासन लॉ एंड ऑर्डर को बनाए रखने के लिए पूरी तरह सतर्क हैं।
संभल जामा मस्जिद विवाद: विवाद का कारण
यह विवाद जामा मस्जिद के इतिहास से जुड़ा है। हिंदू पक्ष का दावा है कि यह मस्जिद पहले एक ‘हरि हर मंदिर’ थी, जिसे मुगल शासक बाबर के शासनकाल में तोड़कर मस्जिद में बदल दिया गया। हिंदू पक्ष ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर मस्जिद का सर्वे कराने की मांग की थी।
स्थानीय कोर्ट ने सर्वे का आदेश दिया, जिससे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया। मुस्लिम समाज ने इसका विरोध किया, और इसके परिणामस्वरूप हिंसा भड़क उठी। इस हिंसा में चार लोगों की जान गई और दर्जनों घायल हुए, जिनमें कई पुलिसकर्मी भी शामिल थे।
सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
- ट्रायल कोर्ट को निर्देश: 8 जनवरी तक इस मामले में कोई कार्रवाई न की जाए।
- सर्वे रिपोर्ट पर रोक: रिपोर्ट फिलहाल सार्वजनिक नहीं की जाएगी।
- हाई कोर्ट से निर्देश: याचिकाकर्ता को मामले के लिए हाई कोर्ट का रुख करने का निर्देश दिया।
- शांति और कानून व्यवस्था: प्रशासन को निर्देश दिया कि कानून व्यवस्था बनाए रखें।
आगे की स्थिति
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब मामले की सुनवाई हाई कोर्ट में होगी। इस बीच, यूपी सरकार और प्रशासन ने हिंसा से प्रभावित इलाकों में शांति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों को तैनात किया है। यह मामला न केवल संवेदनशील धार्मिक मुद्दों को उजागर करता है, बल्कि यूपी सरकार और न्यायपालिका के लिए कानून व्यवस्था बनाए रखने की बड़ी चुनौती भी पेश करता है।


