Kisan Protest : संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में हजारों किसान आज नोएडा से दिल्ली की ओर कूच कर रहे हैं। इससे पहले, किसानों और प्रशासन के बीच एक हाईलेवल बैठक हुई, जो विफल रही। लंबे समय से किसान नोएडा की तीनों अथॉरिटीज का घेराव कर रहे हैं। जब उनकी मांगों पर सहमति नहीं बनी, तो उन्होंने “दिल्ली चलो” का नारा बुलंद किया। किसान अब संसद का घेराव करने की योजना बना रहे हैं। वे जमीन अधिग्रहण से प्रभावित किसानों को 10% विकसित प्लॉट और भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के लाभ देने की मांग कर रहे हैं।
दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर कड़ी सुरक्षा
किसानों के इस ऐलान के बाद नोएडा और दिल्ली पुलिस ने सतर्कता बढ़ा दी है। बॉर्डर पर बैरिकेड्स लगाए गए हैं और कई किसान नेताओं को नजरबंद किया जा रहा है। नोएडा से सटे सभी बॉर्डर पर भारी सुरक्षा तैनात की गई है। पुलिस ने ट्रैफिक को संभालने और जनता की सुविधा के लिए मेट्रो के इस्तेमाल की सलाह दी है। हालांकि, दिल्ली-नोएडा मार्ग और चिल्ला बॉर्डर पर जाम की स्थिति बनी हुई है।
रविवार की बैठक रही असफल
रविवार को यमुना प्राधिकरण के सभागार में संयुक्त किसान मोर्चा और प्रशासन के बीच लगभग तीन घंटे तक बैठक चली। लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका। किसानों ने इसे अधिकारियों की तरफ से “कोई ठोस आश्वासन न मिलने” का आरोप लगाते हुए विरोध जारी रखा।
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किसानों की प्रमुख मांगें
किसानों की प्रमुख मांगों में नए भूमि अधिग्रहण कानून के अनुसार 1 जनवरी 2014 के बाद अधिग्रहित भूमि का 4 गुना मुआवजा, 10% विकसित भूखंड, और जिले में सर्किल रेट बढ़ाने की मांग शामिल हैं। वे भूमिधर और भूमिहीन किसानों के बच्चों के लिए रोजगार, पुनर्वास, और हाई पावर कमेटी की सिफारिशों को लागू करने की मांग कर रहे हैं।
दिल्ली मार्च का प्लान
किसानों का दिल्ली मार्च दोपहर 12 बजे नोएडा के महामाया फ्लाईओवर से शुरू होगा। इसमें गौतमबुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, और आगरा समेत 20 जिलों के किसान शामिल होंगे। किसान ट्रैक्टरों के जरिए दिल्ली की ओर बढ़ेंगे। उनका उद्देश्य संसद सत्र के दौरान सरकार पर दबाव बनाना है।
आंदोलन में शामिल संगठन और उनकी मांगें
भारतीय किसान परिषद (BKP), किसान मजदूर मोर्चा (KMM), और संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) जैसे कई संगठन इस मार्च में हिस्सा ले रहे हैं। किसान ऋण माफी, किसानों और खेत मजदूरों के लिए पेंशन, बिजली दरों में वृद्धि रोकने, पुलिस मामलों की वापसी, लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों को न्याय, भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 की पुनर्स्थापना, और आंदोलन के दौरान शहीद किसानों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं।


