National News : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने भारत में जनसंख्या वृद्धि दर में गिरावट पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि देश की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) 2.1 के बजाय कम से कम 3 होनी चाहिए। भागवत ने यह भी कहा कि जनसंख्या दर 2.1 से नीचे जाने पर समाज के विलुप्त होने का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने परिवार को समाज का अभिन्न अंग बताते हुए इसे संरक्षित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
सपा सांसद ने उठाए सवाल
भागवत के बयान पर समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने प्रतिक्रिया देते हुए सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “भागवत जी और मोदी जी को यह तय करना चाहिए कि सही क्या है, क्योंकि इससे नागरिक भ्रमित हो रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि बच्चों को जन्म देना ऊपर वाले की देन है और इसे रोकना नहीं चाहिए। बर्क ने भागवत के बयान को लेकर सरकार की नीतियों पर असमंजस की बात कही।
रामगोपाल यादव की प्रतिक्रिया
सपा के महासचिव रामगोपाल यादव ने आरएसएस चीफ के बयान पर अपने स्वयंसेवकों को बच्चे पैदा करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यदि जनसंख्या बढ़ाने की जरूरत है, तो स्वयंसेवक (National News) इस पर काम करें। भागवत ने अपने बयान में कहा था कि 2.1 से नीचे की प्रजनन दर से समाज पर गंभीर असर हो सकता है, जो कई भाषाओं और संस्कृतियों के विलुप्त होने का कारण बन सकता है।
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जयंत पाटिल का तर्क
एनसीपी नेता जयंत पाटिल ने भागवत के बयान का विरोध करते हुए कहा कि देश की अत्यधिक जनसंख्या पहले से ही बड़ी समस्या है। उन्होंने कहा, “जनसंख्या वृद्धि से पानी, अनाज और अन्य संसाधनों की कमी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।” पाटिल ने भागवत के बयान को असंगत बताते हुए इसे देश के लिए नकारात्मक प्रभाव वाला विचार बताया।


