UP News : उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में एक नया पहल देखने को मिल रहा है, जहाँ अब दूध की तरह गोमूत्र भी बिक रहा है। यह पहल महिलाओं के समूह द्वारा संचालित की जा रही है और इसे एक विशेष रूप से महिला सशक्तिकरण के रूप में देखा जा रहा है। बुलंदशहर जिले के स्याना तहसील के नरसेना क्षेत्र के भदौरी, भदौरा, नित्यानंदपुर नंगली, नरसेना, मवई, हसनगढ़ी, कपसाई, चरोरा जैसे गांवों में महिलाएं गोमूत्र कलेक्शन सेंटर चला रही हैं, जो न केवल उन्हें आत्मनिर्भर बना रहा है, बल्कि उनके परिवारों की आय में भी वृद्धि कर रहा है।
गोमूत्र का व्यापार
गांवों (UP News) में गोमूत्र की डेयरियां अब एक नया आय का स्रोत बन गई हैं। ठीक वैसे ही जैसे दूध का मूल्य उसकी फैट कंटेंट के आधार पर निर्धारित होता है, वैसे ही गोमूत्र की कीमत उसकी ग्रेविटी के आधार पर तय की जाती है। इस समय गोमूत्र का दाम प्रति लीटर 10 से 20 रुपये तक चल रहा है। इसका मतलब यह है कि किसान अब एक गाय से दूध के अतिरिक्त 100 से 200 रुपये प्रतिदिन गोमूत्र बेचकर कमा रहे हैं।
महिलाओं के समूहों द्वारा इस व्यापार को चलाया जा रहा है। ये महिलाएं अपने-अपने घरों से गोमूत्र एकत्र करती हैं और फिर इसे गांव में स्थित गोमूत्र डेयरियों में बेचती हैं। इस व्यापार से महिलाओं को न केवल आर्थिक मदद मिल रही है, बल्कि वे अपने परिवारों की आय को भी दोगुना कर रही हैं।
महिला समूहों का योगदान
नरसेना क्षेत्र के विभिन्न गांवों में महिला समूहों ने गोमूत्र कलेक्शन सेंटर स्थापित किए हैं। सुषमा देवी, राजकुमारी, कमला देवी, और जगवती देवी जैसी महिला उद्यमियों ने इसे सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ये महिलाएं हर दिन लगभग 10 लीटर गोमूत्र इकट्ठा कर 100 रुपये से 200 रुपये तक की कमाई करती हैं।
नित्यानंदपुर नगली की सुषमा देवी ने बताया कि उनकी डेयरी पर रोजाना 200 लीटर गोमूत्र आता है, जिसे वे बड़े ड्रम में जमा करके फिर गाड़ी से नरसेना स्थित ऑर्गेनिक फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी भेज देती हैं। यहां गोमूत्र की खरीद होती है और इसकी कीमत ग्रेविटी के हिसाब से तय की जाती है।
गोमूत्र से ऑर्गेनिक उत्पाद
नरसेना ऑर्गेनिक फार्मर प्रोड्यूसर (UP News) कंपनी के मालिक डॉ. प्रवीण राणा ने बताया कि गोमूत्र से शोध कर वे ऑर्गेनिक खाद और कीटनाशक दवाएं तैयार कर रहे हैं। इन उत्पादों का उपयोग कर ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा मिल रहा है। जिला प्रशासन इस पहल को प्रोत्साहित कर रहा है, और सहकारी समितियों के जरिए गोमूत्र से बने खाद और कीटनाशकों को बेचा जा रहा है।
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