केंद्र सरकार ने आज, 23 दिसंबर 2024 को ‘नो डिटेंशन पॉलिसी’ को समाप्त करने का ऐलान किया है। इसके तहत अब 5वीं और 8वीं कक्षा के छात्रों को वार्षिक परीक्षा में फेल होने पर अगली कक्षा में प्रमोट नहीं किया जाएगा। पहले, इस पॉलिसी के तहत, फेल होने वाले छात्रों को पास कर अगली कक्षा में प्रमोट कर दिया जाता था, लेकिन अब इस प्रक्रिया में बदलाव किया गया है।
नई व्यवस्था के तहत क्या होगा?
अब, 5वीं और 8वीं कक्षा के फेल छात्रों को उनके रिजल्ट घोषित होने के दो महीने के भीतर एक और परीक्षा देने का मौका मिलेगा। अगर इस दूसरे अवसर में भी छात्र पास नहीं हो पाते, तो उन्हें प्रमोट नहीं किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि छात्रों को अपनी गलतियों को सुधारने का एक और मौका तो मिलेगा, लेकिन अगर वे इसमें सफल नहीं होते हैं तो उन्हें अगली कक्षा में नहीं बढ़ाया जाएगा।
पॉलिसी में क्या खास बदलाव हैं?
इस बदलाव के साथ एक महत्वपूर्ण प्रावधान जोड़ा गया है कि 8वीं कक्षा तक के छात्रों को स्कूल से निष्कासित नहीं किया जाएगा। यानि, फेल होने के बावजूद छात्रों को स्कूल से बाहर नहीं किया जाएगा, जिससे उनकी शिक्षा को प्रभावित नहीं किया जाएगा। यह कदम छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और उनके भविष्य को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
कौन से स्कूलों पर पड़ेगा असर?
यह नया नियम केंद्रीय विद्यालयों, नवोदय विद्यालयों, सैनिक स्कूलों समेत करीब 3,000 से अधिक स्कूलों पर लागू होगा। इसके अलावा, पहले से ही 16 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों (दिल्ली और पुडुचेरी) ने ‘नो डिटेंशन पॉलिसी’ को खत्म कर दिया है और इस नए बदलाव को अपनी शिक्षा प्रणाली में पहले ही लागू कर लिया है।
क्या इस बदलाव से छात्रों और शिक्षकों पर असर पड़ेगा?
‘नो डिटेंशन पॉलिसी’ का उद्देश्य पहले बच्चों को तनावमुक्त शिक्षा देने और अधिक ध्यान केंद्रित करने में मदद करने का था। हालांकि, इस पॉलिसी को खत्म करने से छात्रों पर तनाव बढ़ सकता है, क्योंकि अब उन्हें परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन करने की ज़िम्मेदारी और अधिक होगी। वहीं, शिक्षकों के लिए यह चुनौती भी पैदा कर सकता है, क्योंकि उन्हें छात्रों की कड़ी निगरानी और सुधारात्मक उपायों को अपनाने की जरूरत होगी।
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