Manmohan Singh : भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का निधन 92 वर्ष की आयु में हुआ। उनका निधन 26 दिसंबर 2024 की रात को दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में हुआ। उनकी मृत्यु की खबर ने देशभर में शोक की लहर दौड़ा दी। लंबे समय से बीमार चल रहे डॉ. सिंह के निधन पर भारत सरकार और उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने सम्मानित कदम उठाए हैं।
राजकीय शोक और राष्ट्रीय शोक का ऐलान
डॉ. मनमोहन सिंह के निधन के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 1 जनवरी 2025 तक राज्य में राजकीय शोक की घोषणा की है। इस दौरान यूपी में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा और कोई भी सरकारी मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित नहीं होगा। इसी तरह, भारत सरकार ने भी डॉ. सिंह के निधन पर 7 दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है, जिसमें उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी।
शिक्षा और राजनीतिक यात्रा
डॉ. मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितंबर 1932 को अविभाजित भारत के पंजाब प्रांत के एक छोटे से गाँव में हुआ था। उनकी शिक्षा की शुरुआत पंजाब विश्वविद्यालय से हुई, जहाँ से उन्होंने 1948 में मैट्रिकुलेशन की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद, वह यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज, यूके गए, जहाँ उन्होंने 1957 में अर्थशास्त्र में प्रथम श्रेणी में ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद, 1962 में उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के नफील्ड कॉलेज से अर्थशास्त्र में डी. फिल की उपाधि प्राप्त की।
डॉ. सिंह ने 1991 से 1996 तक भारत के वित्त मंत्री के रूप में कार्य किया। इस अवधि में, उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए कई साहसिक कदम उठाए। उनका नेतृत्व भारतीय आर्थिक सुधारों की दिशा में मील का पत्थर साबित हुआ। उनका योगदान भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में अहम था। डॉ. सिंह के सुधारों ने भारत को आर्थिक संकट से बाहर निकाला और उसे वैश्विक आर्थिक मंच पर मजबूती से खड़ा किया।
प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल
डॉ. सिंह ने 2004 से 2014 तक भारत के प्रधानमंत्री के रूप में अपनी सेवा दी। उनके नेतृत्व में भारत ने कई महत्वपूर्ण राजनीतिक और आर्थिक बदलावों का सामना किया। उन्हें एक उदारवादी और विचारशील नेता के रूप में देखा जाता था, जिन्होंने सशक्त निर्णय लिए और अपने कार्यकाल के दौरान देश की राजनीतिक और आर्थिक दिशा को प्रभावित किया।
अंतिम विदाई और स्मृति
डॉ. मनमोहन सिंह का योगदान भारतीय राजनीति और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में अविस्मरणीय रहेगा। उनका जीवन और कार्य भारतीय राजनीति के एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक बन गए थे। उनका निधन देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है, और उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।


