UP News : उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में किसानों द्वारा किए गए आंदोलन के बाद अब संयुक्त किसान मोर्चे ने अपनी मांगों को लेकर एक बड़ी महापंचायत का आयोजन किया है। यह महापंचायत किसानों की गिरफ्तारी और उनकी विभिन्न मांगों के संदर्भ में बुलाई गई है, और इसमें किसानों की आंदोलन की आगे की रणनीति पर चर्चा होगी।
किसानों ने प्रशासन को एक कड़ा अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि प्रशासन उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं करता, तो वे अपने आंदोलन को और तेज़ करेंगे। किसानों ने प्रशासन को तीन बजे तक का समय दिया है और कहा है कि अगर उनकी मांगे पूरी नहीं होतीं तो वे अपनी रणनीति में बदलाव करेंगे।
किसानों की प्रमुख मांगे गिरफ्तार किसानों की रिहाई, 10% विकसित प्लॉट की मंजूरी, 64% मुआवजा, आवादी का निस्तारण, नक्शा नीति में संशोधन और गांवों के विकास से संबंधित अन्य मुद्दे को लेकर किसानों का कहना है कि इन मुद्दों को तीनों प्राधिकरणों से उन्हें लिखित आश्वासन चाहिए। यदि प्रशासन इन मांगों पर ध्यान नहीं देता, तो वे अपने आंदोलन को और आगे बढ़ाने के लिए मजबूर होंगे।
भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने महापंचायत में अपनी भागीदारी की पुष्टि की है। टिकैत ने कहा कि किसानों की मांगें पूरी तरह से जायज़ हैं, और उन्होंने भारतीय किसान यूनियन की तरफ से किसानों को समर्थन देने का ऐलान किया है। उन्होंने यह भी कहा कि किसान संगठन इस मुद्दे को लेकर प्रशासन पर दबाव बनाए रखेगा।
कई जिलों से किसान लेंगे भाग
महापंचायत में उत्तर प्रदेश के कई जिलों से किसान भाग लेंगे। इनमें गाजियाबाद, मेरठ, हापुड़, बागपत, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, अलीगढ़ और मथुरा शामिल हैं। किसानों का कहना है कि उनकी समस्याओं का समाधान करने के लिए प्रशासन द्वारा किए गए संवाद और वार्ता का कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है। इसके कारण किसानों का आक्रोश और बढ़ गया है।
राकेश टिकैत ने याद दिलाया कि पहले भी ग्रेटर नोएडा के जीरो प्वाइंट पर किसानों ने महापंचायत का ऐलान किया था, लेकिन उससे पहले ही पुलिस ने उन्हें और कई किसानों को हिरासत में ले लिया था। पुलिस की यह कार्रवाई किसानों के गुस्से को और बढ़ाने का कारण बनी है। टिकैत ने कहा कि यदि प्रशासन ने किसानों की मांगों को अनसुना किया, तो किसान अब लखनऊ कूच करेंगे और वहां पर धरना देंगे।
किसान नेता (UP News) ने प्रशासन से कहा कि अब किसानों के साथ कोई भी बदसलूकी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर प्रशासन ने सुधरने की कोशिश नहीं की, तो किसान सड़कों पर उतरकर चक्का जाम करेंगे। राकेश टिकैत ने कहा कि इस सबका जिम्मेदार प्रशासन खुद होगा।
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