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UP Politics : मिल्कीपुर सीट पर भाजपा प्रत्याशी के नाम का हुआ ऐलान, जानिए कौन है चंद्रभान पासवान?

by | Jan 14, 2025 | अपना यूपी, आपका जिला, ट्रेंडिंग, बड़ी खबर, मुख्य खबरें

UP Politics : उत्तर प्रदेश की अयोध्या जिले की मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस सीट पर अपने उम्मीदवार के तौर पर चंद्रभान पासवान का नाम घोषित किया है, जबकि समाजवादी पार्टी (सपा) ने पहले ही अजीत प्रसाद को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। दोनों ही दलों के लिए यह उपचुनाव प्रतिष्ठा का सवाल बन चुका है, और यह सीट अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण युद्धक्षेत्र बन चुकी है।

चंद्रभान पासवान का नाम भाजपा द्वारा मिल्कीपुर सीट से उम्मीदवार के रूप में घोषित होने के बाद उनका राजनीतिक कैरियर भी चर्चा में आ गया है। चंद्रभान पासवान रुदौली से दो बार जिला पंचायत सदस्य रहे हैं और वर्तमान में उनकी पत्नी भी जिला पंचायत सदस्य के पद पर हैं। पासवान परिवार मुख्य रूप से सूरत में साड़ियों का व्यापार करता है, और रुदौली में भी साड़ी का कारोबार चलता है। पिछले दो वर्षों से वह मिल्कीपुर विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय थे और इस दौरान उन्होंने भाजपा की ओर से क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत की थी। इससे पहले 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने गोरखनाथ को यहां से प्रत्याशी बनाया था, लेकिन इस बार चंद्रभान पासवान का चयन भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

सपा ने पहले ही मिल्कीपुर (UP Politics) से अवधेश प्रसाद के बेटे अजीत प्रसाद को अपना प्रत्याशी घोषित किया था। अजीत प्रसाद का नाम क्षेत्र में पहले से ही पहचान बना चुका है, क्योंकि उनके पिता, अवधेश प्रसाद, सपा के विधायक रहे हैं और हाल ही में अयोध्या से सपा के सांसद चुने गए थे। सपा ने इस उपचुनाव को भाजपा को चुनौती देने और लोकसभा चुनाव में मिली अपनी जीत को साबित करने के एक मौके के रूप में देखा है।

इस सीट के महत्व का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सपा ने अपने वरिष्ठ नेता और सांसद अवधेश प्रसाद को प्रचार में सबसे आगे रखा है। इसके साथ ही, सपा ने मिल्कीपुर उपचुनाव को भाजपा के खिलाफ एक मजबूत कदम के रूप में प्रचारित करने का प्रयास किया है।

भाजपा के लिए मिल्कीपुर उपचुनाव एक बड़ी चुनौती है, खासकर अयोध्या लोकसभा सीट पर सपा द्वारा मिली जीत के बाद। भाजपा के लिए यह उपचुनाव अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा को पुनः हासिल करने का एक महत्वपूर्ण अवसर बन चुका है। भाजपा की रणनीति यह है कि वह मिल्कीपुर उपचुनाव जीतकर लोकसभा चुनाव में मिली सपा की जीत को केवल एक ‘तुक्का’ साबित कर सके। इसके साथ ही, यह भाजपा के लिए अपने कार्यों को सही साबित करने और सपा की बढ़त को पीछे धकेलने का मौका भी है।

यह सीट भाजपा के लिए इसलिए और महत्वपूर्ण हो गई है क्योंकि पिछले दो विधानसभा चुनावों में भी भाजपा की लहर के बावजूद मिल्कीपुर सीट पर पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था। इसके बावजूद, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस सीट पर अपने व्यक्तिगत नेतृत्व में चुनावी प्रचार की कमान संभाली है, जो यह दर्शाता है कि भाजपा इस उपचुनाव को लेकर कितनी गंभीर है।

मिल्कीपुर उपचुनाव (UP Politics) की प्रक्रिया 17 जनवरी तक नामांकन की समाप्ति के साथ शुरू होगी। 18 जनवरी को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी, और 20 जनवरी तक प्रत्याशी अपने नाम वापस ले सकेंगे। मतदान 5 फरवरी को होगा और नतीजे 8 फरवरी को घोषित होंगे।

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