Rahul Gandhi : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शनिवार को बिहार की राजधानी पटना में एक महत्वपूर्ण बयान दिया, जिसमें उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा। वे संविधान सुरक्षा सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे, जहां उन्होंने मौजूदा सरकार के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए। राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि इस सरकार में विधायक और सांसदों के पास कोई वास्तविक शक्ति नहीं है और यहां तक कि बीजेपी के सांसद भी इस पर असहमति जता चुके हैं।
राहुल ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के 90 बड़े अधिकारी देश के बजट पर फैसला लेते हैं, लेकिन इनमें से दलित, पिछड़ा वर्ग, आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदायों की भागीदारी महज 10 प्रतिशत भी नहीं है। उनका यह कहना था कि जबकि भारत की जनसंख्या में इन वर्गों का प्रतिशत 90 है, इनका बजट निर्णयों में योगदान नगण्य है।
राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर किया हमला
कांग्रेस नेता ने संविधान के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि जैसे गंगा का पानी हर जगह पहुंचता है, वैसे ही संविधान की भावना और सोच को भी देश के हर कोने में फैलना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत पर हमला करते हुए कहा कि कुछ दिन पहले भागवत ने यह बयान दिया था कि हिंदुस्तान को आजादी 15 अगस्त 1947 को नहीं, बल्कि बाद में मिली। राहुल ने इस बयान को संविधान के खिलाफ माना और कहा कि भागवत संविधान की उस सोच को नकार रहे हैं जो भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी राहुल गांधी ने तीखा हमला किया। उन्होंने याद दिलाया कि मोदी जी पहले कहते थे कि अगर बीजेपी को 400 सीटें मिल जाएं तो वे संविधान को बदल देंगे। लेकिन, जैसा कि राहुल ने बताया, जब सभी लोगों ने मिलकर संविधान की सच्चाई को समझाया और उसे सिर पर धारण किया, तब पीएम मोदी ने अपनी रणनीति बदली। राहुल ने कहा कि आगामी चुनावों में जनता ने यह स्पष्ट कर दिया कि अगर संविधान को सिर पर नहीं रखा, तो बीजेपी को हटा दिया जाएगा।
बीजेपी पर लगाया संविधान को खत्म करने का आरोप
राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने यह भी कहा कि बीजेपी और आरएसएस संविधान को खत्म करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में 20 अरबपति हैं जो पूरे देश का संचालन कर रहे हैं, और बिहार को एक “लेबर फैक्ट्री” बना दिया गया है। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि बिहार पेपर लीक का केंद्र बन गया है और देश में नफरत और मोहब्बत की लड़ाई चल रही है।
जाति जनगणना के मुद्दे पर राहुल गांधी ने अपनी सरकार बनने पर इसे लागू करने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि जाति जनगणना के बिना देश का सही विकास नहीं हो सकता। इसके आधार पर यह पता चलेगा कि किस वर्ग की आबादी कितनी है और उन्हें सरकारी नौकरियों, शैक्षिक संस्थानों और निजी कंपनियों में कितना प्रतिनिधित्व मिल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि गरीबों, मजदूरों और किसानों को देश का धन नहीं मिल रहा, बल्कि यह कुछ चुनिंदा लोगों के हाथों में जा रहा है।
राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने जोर देकर कहा कि वह किसी भी राजनीतिक नुकसान की चिंता नहीं करते, लेकिन जाति जनगणना कराकर रहेंगे। उनका कहना था कि जाति जनगणना एक “एक्स-रे” और “एमआरआई” की तरह है, जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि आरक्षण की 50 फीसदी सीमा को तोड़ने की जरूरत है, और यह 50 प्रतिशत से अधिक होना चाहिए।
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