Milkipur By Election : उत्तर प्रदेश के मिल्कीपुर विधानसभा क्षेत्र में चल रहे उपचुनाव ने अब एक नए मोड़ को लिया है। यह उपचुनाव अब केवल क्षेत्रीय स्तर पर नहीं, बल्कि भाजपा और सपा के शीर्ष नेताओं की प्रतिष्ठा से जुड़ गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच इस चुनाव में कट्टर संघर्ष देखने को मिल रहा है।
मिल्कीपुर में भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चुनावी प्रचार का नेतृत्व कर रहे हैं। रविवार को, जब प्रचार समाप्ति के महज एक दिन पहले की स्थिति थी, मुख्यमंत्री योगी ने एक बड़ी जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी चंद्रभानु पासवान के पक्ष में मतदान की अपील की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने सिर्फ जनसभा को संबोधित नहीं किया, बल्कि पिछली जनसभाओं में दिए गए टास्क की समीक्षा भी की। भाजपा का उद्देश्य यहां पर सिर्फ जीत ही नहीं है, बल्कि कुंदरकी की तरह बड़े अंतर से जीत हासिल करके फैजाबाद में लोकसभा चुनाव में मिली हार का बदला लेना भी है। इसके लिए भाजपा ने पिछले तीन महीनों से सरकार और संगठन में पूरी तरह से समन्वय स्थापित किया और अपनी पूरी ताकत लगाई है।
सपा के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा की बात
दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की प्रतिष्ठा भी इस उपचुनाव से जुड़ी हुई है। सपा ने इस उपचुनाव में अपने कुनबे को भी उतारा है। सांसद डिंपल यादव का रोड शो और धर्मेंद्र यादव की जनसभा में सपा कार्यकर्ताओं का जोश साफ दिखा है। सपा अपने पिछले तीन चुनावी परिणामों को ध्यान में रखते हुए इस बार भी जीत की कोशिश कर रही है। खासकर पिछले दो उपचुनावों के परिणामों ने सपा के हौसले को और बुलंद किया है। हालांकि, यह चुनाव उनके लिए आसान नहीं होगा, क्योंकि भाजपा इस बार पूरी ताकत से मैदान में है।
मिल्कीपुर की राजनीतिक स्थिति
मिल्कीपुर विधानसभा क्षेत्र का राजनीतिक इतिहास भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है। 1998 में सत्ता में रहते हुए भी भाजपा यहां पर उपचुनाव हार गई थी। पिछले तीन चुनावों में लगातार सपा की जीत ने क्षेत्र में उसके प्रभाव को मजबूत किया है। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के गोरखनाथ बाबा यहां से जीते थे, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव और 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा।
सपा ने यहां से अवधेश प्रसाद को विधायक निर्वाचित किया और 2024 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। इस कारण भाजपा अपनी रणनीतियों को इस बार और भी सधे तरीके से तैयार कर रही है।
आखिरी दो दिन का संघर्ष
अब चुनाव प्रचार के दो दिन ही बाकी हैं, और दोनों दलों के लिए यह आखिरी मौका है। रविवार और सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी पार्टी के प्रचार को और मजबूत करने की कोशिश करेंगे, जबकि अखिलेश यादव भी अपनी पार्टी के प्रत्याशी के लिए पूरे जोर-शोर से प्रचार करेंगे। कौन सा दल किस हद तक सफल होता है, यह तो जनता के हाथों में है, लेकिन चुनावी माहौल दोनों दलों के लिए चुनौतीपूर्ण रहेगा।


