Mahakumbh 3rd Amrit Snan : बसंत पंचमी पर अमृत स्नान और उसके बाद के महास्नानमहाकुंभ, जिसे भारत का सबसे बड़ा धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन माना जाता है, इस समय प्रयागराज में धूमधाम से मनाया जा रहा है।
हर 12 साल में आयोजित होने वाले इस आयोजन में लाखों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाने के लिए संगम तट पर पहुंचते हैं। इस बार महाकुंभ में अब तक दो अमृत स्नान हो चुके हैं। पहला अमृत स्नान मकर संक्रांति के दिन और दूसरा मौनी अमावस्या के अवसर पर किया गया था। इन दोनों स्नानों ने लाखों श्रद्धालुओं को शुद्धि और पुण्य के अवसर दिए।
तीसरा अमृत स्नान – बसंत पंचमी
महाकुंभ का तीसरा और आखिरी अमृत स्नान 3 फरवरी 2025 को होगा, जो विशेष रूप से बसंत पंचमी के दिन मनाया जाएगा। जबकि कई लोग इस दिन को लेकर भ्रमित थे कि अमृत स्नान कब होगा, लेकिन अब धार्मिक पंचांग के अनुसार यह तय हो चुका है।
माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 2 फरवरी को सुबह 9 बजकर 14 मिनट पर शुरू होगी और इसका समापन 3 फरवरी को सुबह 6 बजकर 52 मिनट पर होगा। महाकुंभ में अमृत स्नान के लिए ब्रह्म मुहूर्त का समय विशेष महत्व रखता है। इस बार, अमृत स्नान का शुभ मुहूर्त 3 फरवरी को सुबह 5:23 से 6:16 तक रहेगा। इस दौरान पवित्र संगम में डुबकी लगाने से श्रद्धालु पुण्य और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
महाकुंभ के अगले महास्नान
महाकुंभ के दौरान अमृत स्नान के बाद भी कई महत्वपूर्ण स्नान होंगे। इनमें से कुछ प्रमुख स्नान निम्नलिखित हैं
- चौथा महास्नान: माघ पूर्णिमा के दिन, 12 फरवरी 2025 को होगा। यह स्नान भी श्रद्धालुओं के लिए अत्यधिक महत्व रखता है।
- आखिरी महास्नान: महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर, 26 फरवरी 2025 को महाकुंभ का अंतिम महास्नान किया जाएगा। यह स्नान महाकुंभ के समापन का प्रतीक होगा और लाखों श्रद्धालु इस दिन पवित्र संगम में डुबकी लगाएंगे।
महाकुंभ में स्नान करने के नियम
महाकुंभ में स्नान के लिए कुछ विशेष नियम हैं, जो श्रद्धालुओं को पालन करना चाहिए। सबसे पहले, यह परंपरा रही है कि नागा साधु सबसे पहले संगम में स्नान करते हैं। नागा साधुओं को विशेष प्राथमिकता दी जाती है, और यह एक धार्मिक मान्यता है। इसके बाद, गृहस्थ लोग संगम में स्नान करते हैं।


