Jammu Kashmir Security Review: जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार एक बार फिर एक्टिव मोड में नजर आ रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुरुवार 8 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में जम्मू-कश्मीर से जुड़े सुरक्षा हालात की समीक्षा के लिए एक हाई-लेवल बैठक की अध्यक्षता करेंगे। यह बैठक वर्ष 2026 में केंद्र शासित प्रदेश को लेकर होने वाली पहली शीर्ष स्तरीय सुरक्षा समीक्षा होगी।
आतंकवाद और घुसपैठ पर रहेगा मुख्य जोर
सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक का मुख्य उद्देश्य जम्मू-कश्मीर के दुर्गम और पहाड़ी इलाकों में छिपे आतंकवादियों के खिलाफ चल रहे अभियानों की समीक्षा करना है। इसके साथ ही नियंत्रण रेखा (LoC) और अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) से होने वाली घुसपैठ की कोशिशों को रोकने के लिए मौजूदा रणनीति को और मजबूत करने पर चर्चा होगी।
क्यों अहम है यह बैठक?
हाल के महीनों में जम्मू क्षेत्र के कई इलाकों—जैसे किश्तवाड़, डोडा और उधमपुर—में आतंकियों के साथ मुठभेड़ की घटनाएं सामने आई हैं। खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, सर्दियों के मौसम में आतंकी LoC और IB दोनों मोर्चों से घुसपैठ की फिराक में रहते हैं। ऐसे में यह बैठक सुरक्षा बलों के लिए आगे की कार्रवाई तय करने में बेहद अहम मानी जा रही है।
कौन-कौन होगा बैठक में शामिल?
इस हाई-लेवल सुरक्षा समीक्षा बैठक में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, राज्य के शीर्ष प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी, साथ ही केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।
बैठक में भाग लेने वालों में प्रमुख रूप से:
- मुख्य सचिव अटल डुल्लू
- गृह सचिव चंद्रकर भारती
- पुलिस महानिदेशक (DGP) नलिन प्रभात
- इंटेलिजेंस प्रमुख नीतीश कुमार
- केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन
- सभी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) और खुफिया एजेंसियों के प्रमुख
शामिल रहेंगे।
ग्राउंड रिपोर्ट रखेंगे सुरक्षा एजेंसियां
बैठक के दौरान सीनियर अधिकारी गृह मंत्री अमित शाह को जमीनी हालात, आतंकियों की गतिविधियों, और सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे अभियानों की विस्तृत जानकारी देंगे। विशेष रूप से यह बताया जाएगा कि सर्दियों में दुर्गम इलाकों में आतंकियों की मौजूदगी से कैसे निपटा जा रहा है और किन तकनीकी उपायों से घुसपैठ को रोका जा रहा है।
हालिया मुठभेड़ों से मिले संकेत
बीते कुछ महीनों में सुरक्षाबलों ने कई बार आतंकियों की घुसपैठ की कोशिशों को नाकाम किया है। मुठभेड़ों के दौरान यह भी सामने आया है कि आतंकवादी पाकिस्तान की सेना और ISI के सहयोग से सीमा पार से घुसने की कोशिश कर रहे हैं। इन्हीं इनपुट्स के आधार पर बैठक में आक्रामक और समन्वित रणनीति तैयार करने पर जोर दिया जाएगा।
आगे क्या हो सकता है फैसला?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक के बाद:
- जम्मू क्षेत्र में ऑपरेशन तेज किए जा सकते हैं
- सीमा पर निगरानी और तकनीकी संसाधन बढ़ाए जा सकते हैं
- स्थानीय पुलिस और केंद्रीय बलों के बीच तालमेल और मजबूत होगा
सरकार का साफ संदेश है कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के लिए कोई जगह नहीं छोड़ी जाएगी और हर चुनौती से सख्ती से निपटा जाएगा।
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