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Noida Techie Death Case: नोएडा इंजीनियर मौत मामला, लापरवाही बरतने वाला बिल्डर सलाखों के पीछे

by | Jan 20, 2026 | अपना यूपी, ख़बर, ट्रेंडिंग, बड़ी खबर, मुख्य खबरें

Noida Techie Death Case: नोएडा के सेक्टर-150 में कोहरे और प्रशासनिक लापरवाही की बलि चढ़े सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता के मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। जनता के भारी आक्रोश और शासन की सख्ती के बाद पुलिस ने मंगलवार को इस मामले में नामजद बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार कर लिया है।

इस गिरफ्तारी के साथ ही मामले की तह तक जाने के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) ने भी अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। यह कार्रवाई उन बिल्डरों और अधिकारियों के लिए कड़ा संदेश है जो निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हैं।

पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया आरोपी अभय कुमार ‘एमजेड विजटाउन’ (MZ Wiztown) का मालिक है। नॉलेज पार्क थाना पुलिस ने उसे हिरासत में लिया है। जांच में सामने आया है कि जिस निर्माणाधीन साइट के गड्ढे में गिरकर युवराज की मौत हुई, वह प्रोजेक्ट इसी कंपनी के तहत आता है।

  • FIR और कनेक्शन: पुलिस ने शुरुआत में ‘लोटस ग्रीन्स कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड’ और ‘विजटाउन प्लानर्स’ के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। दस्तावेजों की जांच में पता चला कि विजटाउन ने साल 2020 में लोटस ग्रीन्स से यह संपत्ति खरीदी थी, जिसके बाद अभय कुमार की जिम्मेदारी और भूमिका स्पष्ट हुई।

युवराज की मौत के मामले ने लखनऊ तक हलचल मचा दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एक तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया था, जिसने मंगलवार से अपनी जांच शुरू कर दी।

  • टीम का नेतृत्व: इस हाई-प्रोफाइल जांच का नेतृत्व मेरठ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) भानु भास्कर कर रहे हैं। उनके साथ मेरठ के मंडलायुक्त भानु चंद्र गोस्वामी और पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता अजय वर्मा शामिल हैं।
  • दफ्तर से घर तक जांच: यह टीम मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे नोएडा विकास प्राधिकरण के दफ्तर पहुंची। वहां अधिकारियों से पूछताछ और दस्तावेजों की जांच के बाद, टीम मृतक युवराज के घर भी गई और उनके शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर न्याय का भरोसा दिलाया।

गौरतलब है कि 16 जनवरी की रात घना कोहरा युवराज के लिए काल बन गया था। 27 वर्षीय युवराज अपनी कार से घर लौट रहे थे, तभी उनकी गाड़ी एक निर्माणाधीन मॉल के लिए खोदे गए विशाल गड्ढे में जा गिरी।

  • सुरक्षा नदारद: यह गड्ढा पानी से लबालब भरा था और सड़क किनारे कोई भी बैरिकेडिंग, रिफ्लेक्टर या चेतावनी बोर्ड नहीं था।
  • जानलेवा गलती: यह गड्ढा बेसमेंट बनाने के लिए खोदा गया था, लेकिन इसे खुला छोड़ देना बिल्डर की घोर लापरवाही थी। इसी ‘मौत के जाल’ में फंसकर एक होनहार इंजीनियर ने दम तोड़ दिया।

बिल्डर की गिरफ्तारी और SIT की सक्रियता से उम्मीद जगी है कि इस मामले में न केवल दोषियों को सजा मिलेगी, बल्कि नोएडा प्राधिकरण के उन अधिकारियों पर भी गाज गिरेगी जिनकी अनदेखी से यह हादसा हुआ। SIT अपनी रिपोर्ट जल्द ही सरकार को सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की बड़ी कार्रवाई तय की जाएगी।

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