IND vs NZ T20: नागपुर के मैदान पर टीम इंडिया ने न्यूजीलैंड को 48 रनों से हराकर टी20 सीरीज का आगाज भले ही धमाकेदार अंदाज में किया हो, लेकिन इस जीत की चमक के पीछे एक ऐसा ‘अंधेरा’ छिपा है जो टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सपने को चकनाचूर कर सकता है।
सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में भारतीय टीम ने बल्लेबाजी और गेंदबाजी में तो कीवियों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया, लेकिन फील्डिंग के मोर्चे पर जो नजारा दिखा, वह किसी भी चैंपियन टीम के लिए शोभा नहीं देता। अगर रायपुर में होने वाले दूसरे टी20 और आने वाले वर्ल्ड कप में यह सिलसिला नहीं थमा, तो टीम इंडिया को भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
स्कोरबोर्ड का भ्रम और हकीकत
नागपुर टी20 में भारत ने पहले खेलते हुए 238 रनों का पहाड़ जैसा स्कोर खड़ा किया। जवाब में न्यूजीलैंड की टीम 190 रन ही बना सकी। ऊपरी तौर पर यह एक आसान जीत लगती है, लेकिन मैच के दौरान कई ऐसे पल आए जब भारतीय फील्डर्स ने कीवी बल्लेबाजों को थाली में सजाकर मौके दिए। ग्लेन फिलिप्स और मार्क चैपमैन जैसे विस्फोटक बल्लेबाजों ने इन जीवनदानों का फायदा उठाते हुए भारतीय गेंदबाजों की खूब खबर ली। अगर स्कोरबोर्ड पर रन कम होते, तो यही गलतियां मैच का पासा पलट सकती थीं।
हाथों से फिसले कैच, फिसली साख
क्रिकेट में कहावत है—’कैच विन मैचेस’ (Catches Win Matches), लेकिन भारतीय खिलाड़ी शायद इसे भूल गए।
- रिंकू सिंह की चूक: मार्क चैपमैन जब महज 16 रन पर थे, तब रिंकू सिंह ने उनका एक बेहद आसान कैच टपका दिया। नतीजा यह हुआ कि चैपमैन ने 37 रन कूट दिए।
- अभिषेक और ईशान की सुस्ती: मैच के अंतिम ओवरों में डैरिल मिचेल को एक नहीं, बल्कि दो बार जीवनदान मिला। 16वें ओवर में अभिषेक शर्मा ने और 19वें ओवर में ईशान किशन ने उनके कैच छोड़े। हालांकि तब तक मैच पकड़ में था, लेकिन एक सेट बल्लेबाज को ऐसे मौके देना ‘क्राइम’ से कम नहीं है।
रन आउट: संजू सैमसन का ‘ब्लंडर‘
खराब फील्डिंग का सिलसिला सिर्फ कैच तक सीमित नहीं था। ग्राउंड फील्डिंग और थ्रोइंग में भी टीम इंडिया सुस्त नजर आई।
- सबसे हैरान करने वाला पल तब आया जब संजू सैमसन ने ग्लेन फिलिप्स को रन आउट करने का एक लड्डू जैसा मौका गंवा दिया। उस वक्त फिलिप्स 41 रन पर थे और बाद में उन्होंने 78 रनों की तूफानी पारी खेली।
- इसके अलावा, पारी की शुरुआत में ईशान किशन भी टिम रॉबिन्सन को रन आउट करने में चूक गए थे। स्टंप्स पर सीधा निशाना न लगा पाना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य नहीं है।
वर्ल्ड कप 2026, खतरे की घंटी
यह पहली बार नहीं है जब ‘मैन इन ब्लू’ की फील्डिंग पर सवाल उठे हैं। इससे पहले न्यूजीलैंड के खिलाफ हुई वनडे सीरीज में भी भारत को लचर फील्डिंग का खामियाजा सीरीज गंवाकर भुगतना पड़ा था। अब जब टी20 वर्ल्ड कप 2026 सिर पर है, तो फील्डिंग कोच टी. दिलीप के लिए यह बड़ी चुनौती है।
भारतीय सरजमीं पर होने वाले वर्ल्ड कप में दबाव अधिक होगा। नॉकआउट मैचों में एक कैच छोड़ना या एक रन आउट मिस करना पूरे टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता दिखा सकता है। अगर टीम इंडिया को विश्व विजेता बनना है, तो उन्हें अपनी ‘बटर-फिंगर्स’ (फिसलती उंगलियों) वाली समस्या का इलाज तुरंत खोजना होगा।
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