गाजियाबाद। नगर निगम ने अब स्पैरो कंपनी के खिलाफ सख्ती अख्तियार कर ली है। यूजर चार्ज को लेकर स्पैरो सॉफ्ट टैक प्राइवेट लिमिटेड की मनमानी को लेकर गठित जांच समिति की मंगलवार को बैठक हुई। बैठक में मेयर सुनीता दयाल ने स्पैरो कंपनी को दो महीने का अल्टीमेटम देते हुए नगर निगम के सारे डाटा को जमा करने और यूजर चार्ज को लेकर सभी बिलों को जमा करने के निर्देश दिए। मेयर ने कहा कि कंपनी को दो महीने का समय दिया गया। अगर दो महीने के भीतर कंपनी डाटा जमा नहीं कराती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में अधिकारियों की भूमिका सही नहीं पाई गई है। कर विभाग के अधिकारियों की लापरवाही से स्पैरो कंपनी को मनमानी करने का मौका मिला।
नगर निगम क्षेत्र में कूड़ा कलेक्शन के बदले कंपनी की ओर से यूजर चार्ज वसूला जा रहा है। इसके लिए कंपनी 18 प्रतिशत जीएसटी ले रहा है, जबकि कूड़े से सम्बंधित किसी भी कार्य मे जीएसटी नहीं लगता है। मेयर सुनीता दयाल ने हिन्ट को बताया कि पूरे मामले की जानकारी प्रदेश सरकार को दी जाएगी। किसके कहने पर टेंडर को दस साल के लिए किया गया। कंपनी ने सिर्फ ढाई लाख की बैंक गारंटी पर कार्य हासिल कर लिया। इस मामले में कर विभाग के अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कराई जाएगी। नगर निगम ने डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए स्पैरो कंपनी को यूजर चार्ज लेने का ठेका दिया गया।
मेयर सुनीता दयाल ने कहा कि स्पैरो कंपनी ने नगर निगम का सारा डाटा अपने पास रख लिया है। जबकि यह डाटा नगर निगम की महत्वपूर्ण संपत्ति है। कंपनी इस डाटा का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए कर सकती है। कंपनी की मनमानी को लेकर गठित कमेटी की मंगलवार को बैठक हुई। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि कंपनी से हर हाल में डाटा लेना है। बैठक में नगर आयुक्त विक्रमादित्य मलिक, पार्षद प्रवीण चौधरी, पार्षद राजीव भाटी, पार्षद अजय शर्मा, पार्षद बिल्लू यादव शामिल हुए। बैठक में निर्णय लिया गया कि पांचो जोन में से 1 जोन में नगर निगम खुद यूजर चार्ज की वसूली करेगा।
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नगर निगम के उपाध्यक्ष राजीव शर्मा ने कहा कि स्पैरो कंपनी ने पटना नगर निगम में भी अपनी मनमानी करते हुए डाटा रख लिया था। इसके खिलाफ कंपनी के खिलाफ पटना में एफआईआर दर्ज है। यहां भी उसने डाटा को अपने पास रख लिया। कंपनी अगर डाटा नहीं देती है तो यहां भी एफआईआर दर्ज हो सकती है।
कमेटी के सदस्य प्रवीण चौधरी ने हिन्ट से कहा कि कमेटी ने कंपनी के सभी कार्यों की समीक्षा की। कंपनी को पहले ही ब्लैक लिस्ट कर दिया गया। बैठक में स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश कुमार, जीएम जलकल आनंद त्रिपाठी, लेखा परीक्षक विवेक त्रिपाठी, कविनगर जोनल प्रभारी सुनील राय भी शामिल हुए।


