Champat Rai : लगभग पांच सौ वर्षों के दौरान अनगिनत तपस्वियों और संतों ने त्याग और साधना की है जिसके परिणामस्वरूप आज भव्य राम मंदिर का निर्माण हुआ है। अब सिर्फ प्राण-प्रतिष्ठा बाकी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए गौरव की बात यह है कि राम मंदिर निर्माण की श्रृंखला में नगीना निवासी चंपत राय बंसल (Champat Rai) का नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। सर्वविदित है कि श्री राम जन्मभूमि आंदोलन से लेकर सुप्रीम कोर्ट में जीत और फिर राम मंदिर निर्माण में भी चंपत राय बंसल की अहम भूमिका रही। वह श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव भी हैं। उन्होंने 43 साल पहले राम मंदिर आंदोलन के लिए अपना घर-परिवार और सरकारी नौकरी छोड़ दी थी। नगीना के लोग 22 जनवरी को टीवी पर लाइव कार्यक्रम देखने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
अयोध्या में यात्रा
सुप्रीम कोर्ट का फैसला रामलला (श्रीराम जन्मभूमि) के पक्ष में आने के बाद से चंपत राय अयोध्या में प्रवास कर रहे हैं। वह भव्य मंदिर के अभिषेक की तारीख तय करने मंदिर के डिजाइन को अंतिम रूप देने और 22 जनवरी के लिए हजारों विशिष्ट अतिथियों को आमंत्रित करने में व्यस्त हैं।
संघ की विरासत और मूल्य
विहिप नेता चंपत राय का जन्म 18 नवंबर 1946 को नगीना निवासी रामेश्वर प्रसाद और सावित्री देवी के एक साधारण परिवार में हुआ था। परिवार में 10 भाई-बहनों में चंपत राय दूसरे सबसे बड़े हैं। उनके छोटे भाई, बर्तन व्यापारी सुनील बंसल, अपने परिवार के साथ नगीना में अपने पैतृक घर में रहते हैं। उनके पिता रामेश्वर प्रसाद बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सक्रिय कार्यकर्ता थे। इसलिए चंपत राय को संघ से जुड़ने की प्रेरणा उनके पिता से मिली।
राम की सेवा के लिए शिक्षक के पद से दिया इस्तीफा
उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा नगीना के प्राथमिक विद्यालय से प्राप्त की। उन्होंने अपनी इंटरमीडिएट की पढ़ाई हिंदू इंटर कॉलेज से पूरी की। बी.एससी. अर्जित करने के बाद 1967 में मेरठ कॉलेज, मेरठ से एम.एससी. 1969 में वर्धमान कॉलेज बिजनौर से स्नातक करने के बाद उन्होंने 1970-71 में रोहतक के एक डिग्री कॉलेज में व्याख्याता के रूप में पढ़ाया। 1980-81 में उन्होंने खुद को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लिए पूर्णकालिक समर्पित करने के लिए अपने शिक्षण पद से इस्तीफा दे दिया।
आपातकाल के दौरान जेल गये
1975 के आपातकाल के दौरान चंपत राय आर.एस.एम. में व्याख्याता थे। कॉलेज में ही पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने के लिए आई थी। उन्हें प्राचार्य कार्यालय में बुलाया गया। वहां उन्होंने पुलिस को बताया कि वह थाने में सरेंडर करने के लिए घर से कपड़े लेकर आ रहे हैं। जैसे ही उन्होंने अपने परिवार को अलविदा कहा उनके माता-पिता उनके साथ पुलिस स्टेशन गए। चंपत राय ने करीब 18 महीने जेल में बिताए।
1991 में गए अयोध्या
1980-81 में चंपत राय देहरादून-सहारनपुर में जिला प्रचारक रहे। 1985 में वे मेरठ में विभाग प्रचारक रहे। 1986 में संघ के शीर्ष नेतृत्व द्वारा उन्हें प्रदेश संगठन सचिव नियुक्त किया गया। इसके बाद 1991 में उन्हें क्षेत्रीय संगठन सचिव बनाकर अयोध्या भेजा गया। 1996 में वह विहिप के केंद्रीय मंत्री बने और बाद में 2002 में अंतरराष्ट्रीय मंत्री बने।
चंपत राय को माना जाता है श्रीराम का पटवारी
चंपत राय को रामलला के केस के रिकॉर्ड कीपर के तौर पर जाना जाता है। दशकों से वह मामले के हर पहलू में शामिल रहे हैं। यानी वकीलों के लिए गवाहों की व्यवस्था करना हर सुबह सुप्रीम कोर्ट में उपस्थित होना और सुनवाई के दौरान धैर्यपूर्वक बैठना। यही कारण है कि लोग उन्हें प्यार से “राम लला का रिकॉर्ड-कीपर” भी कहते हैं।


