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Bharat Ratna : कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने के फैसले पर आकाश आनंद ने कहा कि “ये हम सभी के लिए…”

by | Jan 24, 2024 | अपना यूपी, आपका जिला, ख़बर, टॉपिक, ट्रेंडिंग, देश, बड़ी खबर, मुख्य खबरें, राजनीति

Bharat Ratna : केंद्र सरकार ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर को मरणोपरांत भारत रत्न (Bharat Ratna) से सम्मानित करने का फैसला किया है। केंद्र सरकार की घोषणा के अनुसार कर्पूरी ठाकुर को उनकी 100वीं जयंती के अवसर पर भारत रत्न से सम्मानित किया जाएगा। कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने के फैसले पर नेताओं की प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। कर्पूरी ठाकुर इतिहास में एक स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षक और राजनेता के रूप में अपनी पहचान रखते हैं।

आकाश आनंद ने दी प्रतिक्रिया

कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न से सम्मानित किये जाने पर बसपा नेता आकाश आनंद ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। हालांकि खबर लिखे जाने तक बसपा प्रमुख मायावती की ओर से कोई बयान जारी नहीं किया गया है। मायावती के उत्तराधिकारी आकाश आनंद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि सामाजिक न्याय के नायक और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जन नायक कर्पूरी ठाकुर जी को भारत रत्न से सम्मानित करने का निर्णय स्वागत योग्य है।

सभी के लिए खुशी की बात है

आकाश आनंद ने आगे लिखा कि यह हम सभी के लिए खुशी की बात है। बाबू कर्पूरी ठाकुर जी ने हमेशा दलितों, पिछड़ों और शोषितों के कल्याण के लिए विधानसभा से लेकर सड़क तक काम किया और दलितों, पिछड़ों और शोषितों की पीड़ा को शक्ति के साथ उठाया। जन नायक कर्पूरी ठाकुर जी की जयंती पर मेरा कोटि-कोटि नमन।

कुछ ऐसा रहा कर्पूरी ठाकुर का जीवन

कर्पूरी ठाकुर को बिहार की राजनीति में सामाजिक न्याय की अलख जगाने वाला नेता माना जाता है। कर्पूरी ठाकुर का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था। कहा जाता है कि आपातकाल के दौरान तमाम कोशिशों के बावजूद इंदिरा गांधी सरकार उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकी थी। कर्पूरी ठाकुर ने पहली बार 22 दिसंबर 1970 को बिहार की सत्ता संभाली थी। उनका कार्यकाल केवल 163 दिनों तक चला था।

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दो बार संभाली सूबे की सत्ता

1977 में कर्पूरी ठाकुर दूसरी बार राज्य की सत्ता पर काबिज हुए। हालांकि वह अपना दूसरा कार्यकाल पूरा नहीं कर सके। दो साल से भी कम समय में उन्होंने दबे-कुचले और पिछड़े समुदायों के कल्याण के लिए काम किया। उन्होंने अपने छोटे से कार्यकाल के दौरान बिहार के सभी विभागों में हिंदी में काम करना अनिवार्य कर दिया।

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