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Auraiya : भाई ने बहन के शव को बाइक पर रख दुपट्टे से बांधा, स्वास्थ्य सेवाओं का खस्ता हाल

by | Nov 8, 2023 | अपना यूपी, आपका जिला, ट्रेंडिंग, देश, बड़ी खबर, मुख्य खबरें

Auraiya : औरैया जिले में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई जिससे इलाके में स्वास्थ्य सेवाओं की खस्ता हालत का पता चला। सीएचसी (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) में एक युवती के शव को उसके भाई को मोटरसाइकिल पर अपनी पीठ पर बांधकर ले जाना पड़ा। मृतका को ले जाने के लिए एम्बुलेंस या किसी साधन की कोई व्यवस्था नहीं की गई। यह भयावह स्थिति औरैया के सीसीएचसी परिसर में सामने आई जहां नवीन बस्ती पश्चिमी निवासी प्रबल प्रताप सिंह की बेटी अंजलि (20) ने बाल्टी में पानी गर्म करने वाली रॉज को छू लिया।

अंजलि को बेहोशी की हालत में पाए जाने पर उसके परिवार वाले उसे सीएचसी ले गए। वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद जो दृश्य हुआ वह कुछ देर के लिए सीएचसी में खड़े लोगों को स्तबध करने वाला था। चूंकि शव ले जाने के लिए कोई परिवहन उपलब्ध नहीं था इसलिए उसके भाई ने मृतका को बाइक पर बिठाया जबकि दूसरी बहन पीछे बैठी थी। भाई ने अपनी पीठ पर शॉल बाँधकर मृत बहन के शव को सुरक्षित रखा और अपने घर की ओर चल दिया। यह पूरा नजारा करीब 15 मिनट तक लोगों की नजरों में रहा। बताया जा रहा है कि घटना मंगलवार को बाबूराम मोहनलाल महाविद्यालय के पास की है जहां नवीन बस्ती पश्चिम में रहने वाली अंजलि नहाने के लिए पानी गर्म करने के लिए कमरे में गई थी।

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युवती की मौत के बाद उसके परिवार ने निराश होकर पोस्टमार्टम न कराने का फैसला किया और शव को लेकर चले गए। इस घटना के दौरान अंजलि का भाई आयुष पिता प्रबल और दूसरी बहन सभी मोटरसाइकिल पर थे। अंजलि की मौत के अचानक सदमे से परिवार का ध्यान एम्बुलेंस की व्यवस्था करने से हट गया। आयुष ने अपनी बहन के शव को बाइक पर रखा यह सुनिश्चित किया कि वह अपने चारों ओर शॉल लपेटे हुए स्थिर रहे। इस दृश्य ने सीएचसी परिसर में मौजूद सभी लोगों को मृतका के लिए उचित सुविधाओं की कमी की ओर ध्यान आकर्षित किया।

अधिकारियों ने उल्लेख किया कि यदि शव को ले जाने के लिए किसी वाहन का अनुरोध किया गया होता तो वह उपलब्ध कराया गया होता। यह मामला शवों को अस्पतालों से घरों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी पर सवाल उठाता है। वर्तमान में जिले में शव परिवहन के लिए मात्र दो वाहन हैं। एक मेडिकल कॉलेज में स्थित है जबकि दूसरा 50 बिस्तरों वाले अस्पताल में कार्य करता है। ये वाहन जिले से लगभग दो घंटे की दूरी पर स्थित हैं। यह घटना अपर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाओं और गंभीर परिस्थितियों में परिवारों द्वारा सामना किए जाने वाले कष्टदायक अनुभव की ओर ध्यान आकर्षित करती है।

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