राजनीति

अपना यूपी

क्राइम

बड़ी खबर

स्पोर्ट्स

वेब स्टोरीज

खबर

Electoral Bonds : सुप्रीम कोर्ट ने दिया एसबीआई को इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदारों की जानकारी को पब्लिक करने का निर्देश

by | Feb 15, 2024 | अपना यूपी, आपका जिला, ख़बर, टॉपिक, ट्रेंडिंग, देश, बड़ी खबर, मुख्य खबरें, राजनीति

Electoral Bonds : गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड योजना (Electoral Bonds) को ‘असंवैधानिक’ करार देते हुए इसकी वैधता रद्द कर दी। शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में यह भी माना कि चुनावी बांड की गोपनीयता अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत सूचना के अधिकार का उल्लंघन है। भारत के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने कहा कि चुनावी बांड योजना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है और काले धन को विनियमित करने का एकमात्र तरीका नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने बैंकों को चुनावी बांड की बिक्री रोकने का निर्देश दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय स्टेट बैंक को यह जानकारी देने का निर्देश दिया कि पांच साल पहले योजना शुरू होने के बाद से उसने किस पार्टी को चुनावी बांड जारी किए हैं। एसबीआई को चुनावी बॉन्ड के जरिए मिलने वाले राजनीतिक चंदे का ब्योरा तीन हफ्ते के भीतर चुनाव आयोग को देना होगा। शीर्ष अदालत ने एसबीआई को अपनी वेबसाइट पर चुनावी बांड से संबंधित जानकारी प्रकाशित करने का भी निर्देश दिया। गौरतलब है कि सीजेआई की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ, जस्टिस संजीव खन्ना, बीआर गवई, जेबी पारदीवाला और मनोज मिश्रा ने पिछले साल 2 नवंबर को इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

राजनीतिक दलों द्वारा खरीदे गए चुनावी बांड का विवरण प्रदान करने के अलावा, एसबीआई को बिना इनकैश चुनावी बांड की राशि भी खरीदार के खाते में वापस करनी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनावी बांड के माध्यम से कॉर्पोरेट दानदाताओं के बारे में जानकारी का खुलासा किया जाना चाहिए क्योंकि चुनावी बांड के माध्यम से कंपनियों द्वारा राजनीतिक चंदा पूरी तरह से लाभ के बदले लाभ की संभावना पर आधारित है।

ये भी पढ़ें : Rajya Sabha : सपा के पक्ष में राज्सभा चुनाव में वोट नहीं करेंगी सपा विधायक पल्लवी पटेल, जानिए क्यों

राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता लाने की पहल के तहत केंद्र सरकार ने 2 जनवरी, 2018 को चुनावी बांड योजना की घोषणा की। चुनावी बांड भारतीय स्टेट बैंक की अधिकृत शाखाओं से कोई भी भारतीय व्यक्ति खरीद सकता है। भारत में स्थापित या निगमित नागरिक या व्यवसाय, संगठन या निगम। चुनावी बांड 1000 रुपये, 10,000 रुपये, 1 लाख रुपये, 10 लाख रुपये और 1 करोड़ रुपये के मूल्यवर्ग में बेचे गए। केवाईसी-अनुपालक खातों के माध्यम से राजनीतिक दलों को दान दिया जा सकता है।

ये भी देखें : Farmers Protest: दिल्ली की तरफ बढ़ रहे किसान, बैरिकेड भी नहीं रोक पाई, अब ये करने वाली है सरकार….!

राजनीतिक दलों को जारी होने के 15 दिनों के भीतर इन्हें भुनाना आवश्यक था। चुनावी बांड खरीदने वाले दानकर्ता का नाम और अन्य जानकारी दर्ज नहीं की गई, इस प्रकार दानकर्ता का नाम गुप्त रखा गया। किसी व्यक्ति या कंपनी द्वारा खरीदे जाने वाले चुनावी बांड की संख्या पर कोई सीमा निर्धारित नहीं थी। केंद्र ने चुनावी बांड योजना लाने के लिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951, कंपनी अधिनियम, 2013, आयकर अधिनियम, 1961 और विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम, 2010 में संशोधन किया था। संसद द्वारा पारित होने के बाद, चुनावी बांड योजना 29 जनवरी, 2018 को अधिसूचित की गई थी।

अपना यूपी

क्राइम

आपका जिला

वीडियो

ट्रेंडिंग

बड़ी खबर