Lok Sabha : बीजेपी के बाद अब बहुजन समाज पार्टी ने भी अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी है। मूल रूप से गढ़ मुक्तेश्वर क्षेत्र के रहने वाले डॉ. मुजाहिद हुसैन उर्फ बाबू भाई को प्रत्याशी बनाया गया है। गुरुवार को जोया में हाईवे स्थित बैंकुएट हॉल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश प्रभारी शमसुद्दीन राईनी, नगीना सांसद व मुरादाबाद के मुख्य सेक्टर प्रभारी गिरीश चंद और जिलाध्यक्ष सोमपाल सिंह की मौजूदगी में घोषणा की।
दो बार जीत हासिल कर चुकी बसपा अब तीसरी बार जीत का ताज पहनने के लिए मैदान में उतरी है। इससे पहले 2009 के लोकसभा चुनाव (Lok Sabha) में उन्होंने बीजेपी उम्मीदवार चेतन चौहान को हराकर जीत हासिल की थी। जबकि 2019 के चुनाव में बीएसपी उम्मीदवार दानिश अली बीजेपी उम्मीदवार चौधरी कंवर सिंह तंवर को हराकर सांसद चुने गए थे।
हालांकि बसपा अन्य चुनावों में जीत का स्वाद नहीं चख सकी लेकिन उसने चार बार निर्णायक भूमिका निभाई। आंकड़ों की बात करें तो बहुजन समाज पार्टी ने अपना पहला चुनाव 1991 में लड़ा था। उसके बाद बसपा की लोकप्रियता बढ़ती चली गई। 1999 में बसपा ने राशिद अल्वी को अपना उम्मीदवार बनाया। इस दौरान उनका मुकाबला बीजेपी प्रत्याशी चेतन चौहान से था।
इस चुनाव में राशिद अल्वी की जीत के साथ ही बहुजन समाज पार्टी का खाता खुल गया। राशिद अल्वी को 337,919 वोट मिले, जबकि चेतन चौहान को 244,694 वोट मिले। 20 साल बाद 2019 के चुनाव में एसपी और बीएसपी ने गठबंधन किया। अमरोहा लोकसभा सीट बसपा के खाते में गई और वहां से कुंवर दानिश अली को उम्मीदवार बनाकर भेजा गया।
इस चुनाव में बीजेपी के मौजूदा सांसद चौधरी कुंवर सिंह तंवर मैदान में थे. कुँवर दानिश अली को 601,082 वोट मिले, जबकि चौधरी कंवर सिंह तंवर को 537,834 वोट मिले। इस चुनाव में भी बसपा के सिर जीत का सेहरा बंधा। हालांकि पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण बहुजन समाज पार्टी ने अपने सांसद कुँवर दानिश अली को निलंबित कर दिया। अब दानिश अली कांग्रेस से चुनाव लड़ने की जुगत में हैं।


