Sambhal Violence : उत्तर प्रदेश के संभल में जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुई हिंसा की न्यायिक जांच के आदेश योगी सरकार ने दिए हैं। इस कदम पर अलग-अलग नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। जहां राज्य सरकार ने कानून व्यवस्था बनाए रखने की प्रतिबद्धता जताई, वहीं विपक्ष ने इस फैसले पर सवाल उठाए।
सपा सांसद अवधेश प्रसाद का बयान
सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने न्यायिक जांच के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे “लोगों का ध्यान भटकाने” का प्रयास बताया। उन्होंने कहा:
“आयोग की रिपोर्ट तीन-चार महीने में आएगी, जिसका कानून में कोई खास महत्व नहीं है। सरकार को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।”
उन्होंने पुलिस की कार्रवाई और दोबारा जांच को लेकर भी सवाल उठाए:
- पहली जांच पर सवाल: पहली बार जांच में कोई हिंसा नहीं हुई थी, फिर दोबारा सर्वे कराने की क्या जरूरत थी?
- पुलिस की भूमिका: हिंसा के दौरान पुलिस ने गोली चलाई, जिससे कई लोग घायल हुए और पांच की मौत हो गई।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश और सांसद की प्रतिक्रिया
सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश पर कि निचली अदालत इस मामले में कोई कार्रवाई न करे, अवधेश प्रसाद ने कहा:
“यह देशहित में लिया गया अच्छा फैसला है। इससे आपसी भाईचारा और कानून का राज कायम रहेगा।”
उन्होंने कहा कि समाज में वैमनस्य फैलाने वालों पर रोक लगाने की जरूरत है।
हिंसा और पुलिस कार्रवाई: अब तक की स्थिति
- हिंसा का कारण: जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान तनाव बढ़ा, जिसके बाद असामाजिक तत्वों ने पथराव किया।
- पुलिस की कार्रवाई: स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा।
- गिरफ्तारी:
- अब तक 28 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
- सीसीटीवी फुटेज और वायरल वीडियो के आधार पर 45 उपद्रवियों की पहचान हुई है। पुलिस ने इनका नाम और पता भी सार्वजनिक किया।
विपक्ष के सवाल और सरकार का रुख
- विपक्ष: सपा और अन्य विपक्षी दलों ने सवाल उठाए कि जब पहली बार सर्वे शांतिपूर्ण था, तो दोबारा सर्वे क्यों कराया गया।
- सरकार: योगी सरकार का कहना है कि न्यायिक जांच से सभी तथ्य सामने आएंगे, और हिंसा में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।


