UP Politics : लोकसभा चुनाव से पहले एक अहम घटनाक्रम (UP Politics) में बसपा सांसद रितेश पांडे रविवार को बीजेपी में शामिल हो गये। 2019 में अंबेडकरनगर लोकसभा सीट पर रितेश पांडे ने योगी सरकार में मंत्री रहे मुकुट बिहारी वर्मा को हराकर जीत हासिल की थी। रितेश की अहमियत इसी बात से समझी जा सकती है कि उनके बसपा छोड़ने पर मायावती की भी प्रतिक्रिया सामने आई। बसपा प्रमुख ने रितेश पांडे को लोकसभा संसदीय दल का नेता नियुक्त किया था। 42 वर्षीय रितेश पांडे के पास यूरोपियन स्कूल, लंदन से इंटरनेशनल बिजनेस मैनेजमेंट में स्नातक की डिग्री है।
रितेश एक राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता राकेश पांडे 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के टिकट पर अंबेडकरनगर जिले के जलालपुर विधानसभा क्षेत्र से चुने गए थे। इससे पहले राकेश पांडे 2009 से 2014 तक अंबेडकरनगर से सांसद थे। 2019 के लोकसभा चुनाव में रितेश पांडे ने भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और योगी की पहली सरकार में मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा को हराया था। इससे पहले 2017 के विधानसभा चुनाव में रितेश पांडे जलालपुर से बसपा विधायक चुने गए थे। उत्तर प्रदेश में 2019 के लोकसभा चुनाव में बसपा ने सपा के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा और राज्य की 80 सीटों में से अंबेडकरनगर सहित 10 सीटें जीतीं।
लोकसभा के लिए बसपा के टिकट पर चुने गए रितेश पांडे ने रविवार को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और दिल्ली में भाजपा में शामिल हो गए। बसपा प्रमुख को संबोधित पत्र में रितेश पांडे ने शिकायत की कि उनसे और वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क करने के अनगिनत प्रयासों के बावजूद उन्हें न तो पार्टी की बैठकों में आमंत्रित किया जा रहा है और न ही नेतृत्व स्तर पर उनसे सलाह ली जा रही है। मैं इस नतीजे पर पहुंच गया हूं कि अब पार्टी को मेरी सेवा और मौजूदगी की कोई जरूरत नहीं है इसलिए प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने के अलावा मेरे पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है। पार्टी से नाता तोड़ना भावनात्मक रूप से कठिन फैसला है।
अम्बेडकरनगर से बसपा के लोक सभा सांसद ने पत्र में लिखा कि इस पत्र के माध्यम से मैं बहुजन समाज पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देता हूं और आपसे आग्रह करता हूं कि मेरा इस्तीफा तुरंत स्वीकार करें। कुछ घंटों बाद वह नई दिल्ली में भाजपा में शामिल हो गए। वह उत्तर प्रदेश प्रभारी बैजयंत जय पांडा, महासचिव तरुण चुघ और राज्य इकाई के अध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह सहित पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में भाजपा में शामिल हुए। इस दौरान उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक भी मौजूद रहे।
बसपा प्रमुख मायावती ने रविवार को सोशल मीडिया पर कई पोस्ट में रितेश पांडे का जिक्र किए बिना लिखा कि बीएसपी राजनीतिक दल के साथ ही परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के आत्म-सम्मान व स्वाभिमान के मिशन को समर्पित मूवमेन्ट भी है जिस कारण इस पार्टी की नीति व कार्यशैली देश की पूंजीवादी पार्टियों से अलग है जिसे ध्यान में रखकर ही चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार भी उतारती है। गौरतलब हो कि बसपा सुप्रीमो मायावती ने ये पोस्ट ऐसे समय में किया जब रितेश पांडे ने पार्टी से इस्तीफा दिया।
अब बीएसपी के सांसदों को इस कसौटी पर खरा उतरने के साथ ही स्वंय जाँचना है कि क्या उन्होंने अपने क्षेत्र की जनता का सही ध्यान रखा? क्या अपने क्षेत्र में पूरा समय दिया? साथ ही, क्या उन्होंने पार्टी व मूवमेन्ट के हित में समय-समय पर दिये गये दिशा-निर्देशों का सही से पालन किया है? ऐसे में अधिकतर लोकसभा सांसदों का टिकट दिया जाना क्या संभव, खासकर तब जब वे स्वंय अपने स्वार्थ में इधर-उधर भटकते नजर आ रहे हैं व निगेटिव चर्चा में हैं। मीडिया द्वारा यह सब कुछ जानने के बावजूद इसे पार्टी की कमजोरी के रूप में प्रचारित करना अनुचित। बीएसपी का पार्टी हित सर्वोपरि।


