Mahakumbh Stampede : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ के दौरान मौनी अमावस्या के स्नान के अवसर पर मची भगदड़ ने एक बार फिर से श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस भगदड़ में कई लोगों की जान गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। बिहार के बलिया जिले के केनसीराबाद से एक परिवार भी महाकुंभ में भाग लेने के लिए गया था, लेकिन इस घटना में उनके जीवन का सबसे बड़ा संकट आ गया।
दिनेश पटेल, उनकी पत्नी रीना, बेटी रोशनी और उनकी मां ललिता देवी ने संगम में मौनी अमावस्या का स्नान करने के लिए प्रयागराज का रुख किया था। जानकारी के अनुसार, दिनेश पटेल के परिवार के लोग सुबह के समय संगम में स्नान करने के लिए तट पर पहुंचे थे, तभी भगदड़ मच गई। इस भगदड़ में दिनेश की पत्नी रीना और बेटी रोशनी की मौत हो गई।
दिनेश पटेल के चाचा महेंद्र पटेल ने बताया कि उनका परिवार गांव के अन्य एक दर्जन लोगों के साथ प्रयागराज पहुंचा था। वह सब इस धार्मिक अवसर पर खुश थे, लेकिन किसी को यह नहीं पता था कि यह खुशी दर्द में बदल जाएगी। महेंद्र पटेल ने बताया कि घटना के बाद दिनेश ने उन्हें फोन किया और बताया कि तट पर भगदड़ मच गई, जिसके परिणामस्वरूप उनकी पत्नी और बेटी की मौत हो गई।
भगदड़ की शिकार हुई मां और बेटी
घटना के बाद, दिनेश पटेल के परिवार में कोहराम मच गया। महेंद्र पटेल के मुताबिक, गांव में जैसे ही यह खबर फैली, हर कोई दिनेश के मोबाइल पर कॉल करने लगा। वहीं, दिलीप पटेल, जो दिनेश के भतीजे हैं, ने बताया कि उनके चाचा इस समय बहुत ही सदमे में हैं और उनके दो छोटे बेटे – 14 और 16 साल के बच्चे भी इस दुखद घटना को समझ नहीं पा रहे हैं। वे बार-बार अपने पिता से पूछ रहे हैं कि उनकी मां और बहन के साथ ऐसा क्यों हुआ और पिताजी कब लौटेंगे।
घटना के बारे में दिलीप पटेल ने कहा कि रात के करीब आधे समय में उनका परिवार संगम तट की ओर बढ़ रहा था। लेकिन अचानक भीड़ बेकाबू हो गई, और उनके भतीजे रोशनी को बचाने की कोशिश करते हुए उनकी मां रीना भी गिर पड़ीं। दबाव के कारण ही दोनों की जान चली गई। दिलीप ने बताया कि प्रशासन द्वारा भी शवों का पोस्टमार्टम सही समय पर नहीं कराया गया और उन्हें एम्बुलेंस से शव ले जाने की सलाह दी गई।
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