UP Byelection : उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा उपचुनाव की तैयारियाँ जोर-शोर से चल रही हैं, और सियासी दलों ने अपनी रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। इस बीच, उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। भाजपा, कांग्रेस, सपा (समाजवादी पार्टी), और बसपा (बहुजन समाज पार्टी) ने उपचुनाव के लिए अपनी कमर कस ली है। इसी संदर्भ में, बसपा सुप्रीमो मायावती के ताजे बयान ने सपा और कांग्रेस के गठबंधन को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
सपा-बीएसपी के बीच खटास की पुष्टि
मायावती ने हाल ही में सपा और बसपा (UP Byelection) के गठबंधन के टूटने की वजह को लेकर खुलासा किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद जब गठबंधन को केवल पांच सीटें मिलीं, तो सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बीएसपी सुप्रीमो मायावती से संपर्क तोड़ लिया और उनका फोन उठाना बंद कर दिया। इस बयान से सपा और बीएसपी के बीच के रिश्तों में खटास की पुष्टि होती है।
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बसपा ने हाल ही में एक 59 पेजों की बुकलेट जारी की है जिसमें पार्टी कार्यकर्ताओं को मायावती के महत्वपूर्ण फैसलों और उनकी रणनीति के बारे में जानकारी दी गई है। इस बुकलेट में मायावती ने स्पष्ट किया है कि क्यों सपा के साथ गठबंधन टूट गया। उन्होंने 1993 के गठबंधन का जिक्र करते हुए बताया कि सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने कांग्रेस और बीजेपी के जातिवादी रुख को देखते हुए दलितों और पिछड़े वर्ग के एकजुट होने की कोशिश की थी। हालांकि, मायावती का आरोप है कि मुलायम सिंह यादव की जातिवादी सोच और आपराधिक गतिविधियों के कारण गठबंधन सफल नहीं हो सका, जिससे बीएसपी को मजबूरी में समर्थन वापस लेना पड़ा।
सपा-कांग्रेस गठबंधन पर उठाए सवाल
मायावती ने बुकलेट में यह भी बताया है कि 2019 में सपा के साथ गठबंधन क्यों किया गया था। उनके अनुसार, अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी की पिछली गलतियों को भुलाकर बीजेपी को रोकने के लिए एक और मौका मांगा था। लेकिन लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ गठबंधन करके पीडीए (प्रगतिशील लोकतंत्र गठबंधन) के लोगों को गुमराह करने के बावजूद, कोई ठोस सफलता हासिल नहीं हो पाई। मायावती ने बुकलेट में यह भी आरोप लगाया है कि सपा ने प्रमोशन में आरक्षण के बिल को फाड़ा और इसमें कांग्रेस की मिलीभगत रही।
यह पहली बार है जब मायावती ने सीधे तौर पर सपा नेतृत्व को गठबंधन टूटने के लिए जिम्मेदार ठहराया है। लोकसभा चुनाव में बसपा ने अकेले दम पर चुनाव लड़ा था और पार्टी का खाता नहीं खुला। इस दौरान, बसपा का कोर दलित वोटबैंक सपा और कांग्रेस के इंडिया गठबंधन की ओर शिफ्ट हो गया है। मायावती इस बदलाव को समझते हुए सपा-कांग्रेस गठबंधन पर लगातार हमले कर रही हैं।


