CM Yogi : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मकर संक्रांति के अवसर पर मंगलवार की भोर में गोरखनाथ मंदिर में गुरु गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाई। यह परंपरा हर वर्ष मकर संक्रांति के दिन होती है, जब श्रद्धालु अपनी आस्था और श्रद्धा के साथ खिचड़ी अर्पित करते हैं। इस दिन को विशेष रूप से सूर्य के उत्तरायण होने के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है और इसे समृद्धि, सुख-शांति और समग्र कल्याण के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह पर्व भगवान सूर्य के प्रति आभार प्रकट करने का पर्व है, जो ऊर्जा और प्रकाश का स्रोत हैं। इसके साथ ही उन्होंने सभी संतों, श्रद्धालुओं और भक्तों को भी इस पर्व की बधाई दी।
गोरक्षपीठाधीश्वर महंत योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मकर संक्रांति को सनातन धर्म के अनुयायी देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग नामों से मनाते हैं। इस दिन को लेकर विशेष रूप से गोरखनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी। उन्होंने यह भी बताया कि मकर संक्रांति के दिन महाकुंभ का पहला अमृत स्नान भी है, जिसमें लाखों श्रद्धालु त्रिवेणी संगम में स्नान करते हैं। 13 जनवरी को लगभग 1.75 करोड़ श्रद्धालुओं ने इस पवित्र संगम में डुबकी लगाई।
गोरखनाथ मंदिर में खिचड़ी चढ़ाने के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग चुकी थीं। मंदिर के अंदर श्रद्धालुओं के आने-जाने का सिलसिला जारी था और खिचड़ी चढ़ाने के लिए बड़ी संख्या में लोग अपनी श्रद्धा और आस्था के साथ पहुंचे थे। गोरखनाथ इलाके में सोमवार रात को ही पूर्वांचल के हजारों श्रद्धालु सिर पर चावल की गठरी लिए नजर आ रहे थे। मंदिर में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं का भारी रेला और सुरक्षा कर्मियों की चहलकदमी ने मंदिर के माहौल को और भी भक्तिमय बना दिया था।
श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
मकर संक्रांति के इस महापर्व पर गोरक्षपीठाधीश्वर और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ब्रह्म मुहूर्त में गुरु गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाकर जनमानस की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। यह अनूठी परंपरा लोक को समर्पित है, जो सूर्यदेव के उत्तरायण होने के साथ जुड़ी हुई है। मान्यता है कि जो भी बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी अर्पित करता है, उसकी सभी मन्नतें पूरी होती हैं।
आज मकर संक्रांति (CM Yogi) के दिन, गोरक्षपीठ की तरफ से सबसे पहले खिचड़ी अर्पित की जाती है। इसके बाद नेपाल राजपरिवार द्वारा भी खिचड़ी चढ़ाई जाती है। फिर मंदिर के कपाट खोल दिए जाते हैं और जनसामान्य की आस्था खिचड़ी के रूप में निवेदित होनी शुरू हो जाती है। इस दिन गोरखपुर और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु गोरखनाथ मंदिर में खिचड़ी चढ़ाने के लिए पहुंचते हैं।


