Delhi Assembly Election : दिल्ली, जो कभी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के लिए एक चुनौतीपूर्ण राज्य बन गई थी, अब भी पार्टी के लिए एक जटिल पहेली बनी हुई है। पिछले ढ़ाई दशकों में बीजेपी दिल्ली में अपनी पैठ बनाने में लगातार संघर्ष करती रही है। 2014 में नरेंद्र मोदी की अगुवाई में पार्टी ने पूरे देश में एक अभूतपूर्व जीत हासिल की थी, लेकिन दिल्ली में स्थिति पूरी तरह से अलग थी।
बीजेपी की लहर
साल 2014 में जब बीजेपी की लहर हर राज्य में बेकाबू होकर फैल रही थी, तो दिल्ली का विधानसभा चुनाव एक अप्रत्याशित मोड़ पर आया। इस चुनाव में अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी आम आदमी पार्टी (AAP) ने ऐसी आंधी मचाई, कि बीजेपी के किले में सेंध लग गई। आम आदमी पार्टी ने 70 में से 67 सीटों पर जीत हासिल की, और बीजेपी का खाता भी नहीं खुल पाया। यह बीजेपी के लिए एक बड़ा झटका था, खासकर जब पार्टी ने एक साल पहले 2014 के लोकसभा चुनाव में दिल्ली की सभी सातों लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी।
यह जीत अरविंद केजरीवाल की अगुवाई में आम आदमी पार्टी के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी। पार्टी की यह जीत दिल्ली में केजरीवाल के राजनीतिक कद को और मजबूत करने का कारण बनी। इसके साथ ही, यह जीत बीजेपी के लिए चुनौती बन गई, क्योंकि केजरीवाल ने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता को चुनौती दी थी। 2015 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के लिए यह हार एक चेतावनी बन गई कि अब दिल्ली में पार्टी के लिए स्थिति उतनी सरल नहीं रही।
इस दौरान, बीजेपी ने देश के अन्य राज्यों में अपनी ताकत बढ़ाई। 2018 तक बीजेपी ने देश के 15 राज्यों में पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाई थी। लेकिन दिल्ली में पार्टी की स्थिति कमजोर ही रही। इसके बावजूद, 2019 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने एक बार फिर शानदार जीत हासिल की, और पार्टी ने 303 सीटों पर विजय प्राप्त की। इस बार बीजेपी ने दिल्ली की सभी सात लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी, जिससे यह महसूस हुआ कि दिल्ली में अब बीजेपी का रास्ता साफ होगा।
कई सालों बाद बीजेपी को मिली जीत
कई सालों से दिल्ली में बीजेपी की लोकसभा में तो जीत हो रही थी, लेकिन विधानसभा चुनाव में पार्टी को कोई बड़ी सफलता नहीं मिल रही थी। एक सवाल लगातार उभरता था कि आखिर ऐसा क्यों होता है कि लोकसभा चुनावों में 50 प्रतिशत से अधिक वोट पाने वाली बीजेपी विधानसभा में अपनी जड़ें नहीं जमा पाती?
इस सवाल का जवाब केवल राजनीति के मिजाज में ही नहीं, बल्कि दिल्ली की विशिष्ट सामाजिक और सांस्कृतिक संरचना में भी छिपा हुआ है। दिल्ली के मतदाता की सोच और चुनावी प्राथमिकताएं कई बार राष्ट्रीय मुद्दों से ज्यादा स्थानीय और व्यक्तिगत मुद्दों पर आधारित होती हैं। यही कारण था कि केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने इस रणनीति को समझते हुए दिल्ली की राजनीति को अपना एक अलग रंग दिया।
नरेंद्र मोदी (Delhi Assembly Election) के नेतृत्व में बीजेपी ने लोकसभा चुनावों में कई बड़े विजयों को अपने नाम किया, लेकिन दिल्ली में विधानसभा चुनावों में कोई ठोस सफलता नहीं मिली। हालांकि, 2019 के बाद बीजेपी ने दिल्ली में कई कोशिशें कीं, लेकिन आम आदमी पार्टी की मजबूत पकड़ और अरविंद केजरीवाल की लोकप्रियता ने बीजेपी के लिए किसी भी राजनीतिक रास्ते को कठिन बना दिया।


