Kanpur News : भगवान श्री कृष्ण, जिन्हें दुनिया द्वापर युग के महानायक और धर्म के रक्षक के रूप में पूजती है, वर्तमान में कानपुर देहात के शिवली थाने में 22 वर्षों से ‘कैद’ हैं। उनके साथ राधा और बलराम की भी मूर्तियाँ इसी कानूनी उलझन का शिकार हैं। यह अजीब विडंबना है कि द्वापर युग में जन्म लेते ही श्री कृष्ण ने कंस के कारागार से मुक्त होकर अपना धर्म निभाया था, लेकिन कलयुग में वे अब तक थाने के चारदीवारी में बंद हैं।
22 साल पहले की घटना
22 साल पहले, कानपुर (Kanpur) देहात के शिवली के एक प्राचीन मंदिर से श्री कृष्ण, राधा, बलराम और लड्डू गोपाल के बाल स्वरूप की मूर्तियाँ चोरी हो गई थीं। ये मूर्तियाँ करोड़ों रुपये की थीं, और उनके चोरी होने के बाद स्थानीय पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए चोरों को गिरफ्तार कर लिया और मूर्तियाँ बरामद कर लीं, लेकिन मामला न्यायालय में विचाराधीन हो गया।
चमत्कार या अपराधबोध?
इस मामले में एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब चोर ने खुद थाने में आकर मूर्तियों को वापस पुलिस के हवाले किया और अपने जुर्म को स्वीकार किया। चोर ने दावा किया कि भगवान कृष्ण उसके सपने में आए थे और उसे मूर्तियाँ वापस करने का आदेश दिया था। इस घटना ने पुलिस को भी हैरान कर दिया, और इसे भगवान का चमत्कार माना गया।
न्यायालय की धीमी गति और भगवान की ‘कैद’
हालांकि, पुलिस की त्वरित कार्रवाई के बावजूद, मामला न्यायालय में लटक गया और 22 वर्षों से तारीखों का सिलसिला जारी है। चोर पैरोल पर बाहर हैं, लेकिन भगवान श्री कृष्ण, राधा और बलराम की मूर्तियाँ अब भी थाने में कैद हैं। यह और भी विडंबनापूर्ण है कि जबकि पूरी दुनिया जन्माष्टमी के उत्सव में मग्न रहती है, श्री कृष्ण की मूर्ति कानूनी प्रक्रिया के चलते थाने में ही बंधी हुई है।
कब मिलेगी भगवान को ‘मुक्ति’?
यह मामला आस्था और न्यायिक प्रक्रिया के बीच की खाई को स्पष्ट रूप से उजागर करता है। जहां एक ओर लोगों की आस्था इन मूर्तियों में बसी हुई है, वहीं दूसरी ओर न्यायालय की धीमी प्रक्रिया ने इन देवताओं को ‘कैदी’ बना दिया है।
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