PM Modi : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को बिहार के जमुई जिले का दौरा करेंगे, जहां वह गौरव दिवस के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इस दिन को खास बनाने के लिए भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती मनाई जाएगी, जो जनजातीय समुदाय के महान नेता और स्वतंत्रता सेनानी थे। प्रधानमंत्री मोदी इस अवसर पर जमुई में 6,640 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे।
भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती
जनजातीय गौरव दिवस भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है, जो न केवल आदिवासी समुदाय के लिए एक प्रेरणा का स्रोत हैं, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भूमिका को भी श्रद्धांजलि अर्पित करने का अवसर है। भगवान बिरसा मुंडा ने आदिवासी समुदाय के अधिकारों के लिए संघर्ष किया और उनका योगदान भारतीय इतिहास में अमूल्य है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य जनजातीय समाज की सांस्कृतिक धरोहर और उनके विकास को बढ़ावा देना है।
प्रधानमंत्री मोदी ने पहले भी कई बार जनजातीय समुदाय के कल्याण के लिए विभिन्न योजनाओं की घोषणा की है। उनका मानना है कि देश के सामाजिक और सांस्कृतिक ताने-बाने को मजबूत करने के लिए जनजातीय समुदाय का विकास और उनके इतिहास को सम्मान देना जरूरी है।
6,640 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाएं
प्रधानमंत्री मोदी जमुई में जिन विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे, उनमें सड़क निर्माण, बुनियादी ढांचे की सुदृढ़ता और अन्य क्षेत्रीय विकास से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। इन परियोजनाओं के जरिए बिहार और विशेष रूप से जमुई जिले के जनजातीय समुदाय को कई लाभ मिलने की संभावना है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने बताया कि ये परियोजनाएं स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाएंगी और रोजगार के अवसर उत्पन्न करेंगी, साथ ही सामाजिक एवं सांस्कृतिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
इन परियोजनाओं में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क परिवहन और पानी की आपूर्ति जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सुधार की योजना बनाई गई है। इससे न केवल स्थानीय जनता को राहत मिलेगी, बल्कि यह बिहार के समग्र विकास में भी योगदान करेगा।
बोडोलैंड महोत्सव का उद्घाटन
इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) असम में स्थित साई इंदिरा गांधी खेल परिसर में पहले बोडोलैंड महोत्सव का उद्घाटन करेंगे। यह महोत्सव बोडो समुदाय की भाषा, साहित्य और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए आयोजित किया जा रहा है। दो दिवसीय इस महोत्सव में बोडो समाज की सांस्कृतिक धरोहर और परंपराओं को प्रदर्शित किया जाएगा, और यह क्षेत्रीय पहचान और सामाजिक एकता को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।


