Prayagraj Magh Mela 2026: प्रयागराज की पावन धरती पर चल रहा माघ मेला इस बार आस्था की डुबकी से ज्यादा संतों और प्रशासन के बीच मचे घमासान के लिए चर्चा में है। ज्योतिष्पीठ के दावेदार स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मेला प्रशासन के बीच ठनी रार अब नोटिस और धरने तक पहुंच गई है।
मौनी अमावस्या के शाही स्नान के दौरान शुरू हुआ यह विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। एक तरफ स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पिछले तीन दिनों से खुले आसमान के नीचे धरने पर बैठे हैं, तो दूसरी तरफ मेला प्राधिकरण ने उनके ‘शंकराचार्य’ पदवी इस्तेमाल करने पर कानूनी सवाल खड़े कर दिए हैं।
नोटिस का सच: सुप्रीम कोर्ट का हवाला
माघ मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक कारण बताओ नोटिस जारी किया है, जिसने आग में घी का काम किया है। नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के 2022 के आदेश का हवाला दिया गया है।
- यथास्थिति का उल्लंघन: प्रशासन का कहना है कि ज्योतिष्पीठ शंकराचार्य के पद का मामला अभी सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है और कोर्ट ने ‘यथास्थिति’ (Status Quo) बनाए रखने का आदेश दिया था।
- पदवी पर सवाल: प्रशासन के मुताबिक, जब तक कोर्ट का फैसला नहीं आता, कोई भी खुद को शंकराचार्य घोषित नहीं कर सकता। लेकिन स्वामी जी के शिविर के बाहर लगे बोर्ड और बैनरों पर उनके नाम के आगे ‘शंकराचार्य’ लिखा गया है, जो कोर्ट के आदेश की अवमानना है।
- अल्टीमेटम: प्रशासन ने उन्हें 24 घंटे के भीतर जवाब देने और बोर्ड से पदवी हटाने का निर्देश दिया है।
पालकी और पुलिस: विवाद की असली जड़
इस पूरे विवाद की शुरुआत मौनी अमावस्या के दिन हुई। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपनी परंपरा के अनुसार पहिए वाली पालकी (रथ) पर सवार होकर संगम स्नान के लिए जाना चाहते थे।
- प्रशासन की दलील: मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल का कहना है कि उस दिन करोड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ थी। सुरक्षा कारणों से पहिए वाली पालकी को भीड़ में ले जाने से भगदड़ मचने का खतरा था, इसलिए उन्हें रोका गया और पैदल या गाड़ी से जाने का आग्रह किया गया।
- संत की नाराजगी: वहीं, स्वामी का आरोप है कि पुलिस ने उनके शिष्यों के साथ अभद्रता की, बैरिकेडिंग लगाकर उनका रास्ता रोका और धक्का-मुक्की की। उनका कहना है कि शंकराचार्य हमेशा पालकी में ही शाही स्नान के लिए जाते हैं, यह उनकी परंपरा का अपमान है।
सड़क पर ‘तप‘, अन्न-जल का त्याग
पुलिसिया कार्रवाई और अपमान से नाराज स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने संगम जाने का विचार त्याग दिया और वहीं धरने पर बैठ गए। पिछले तीन दिनों से वह अपने शिविर के गेट पर ही आसन जमाए हुए हैं। उनके मीडिया प्रभारी के अनुसार, स्वामी जी ने अन्न-जल ग्रहण नहीं किया है और वे पुलिस प्रशासन से सार्वजनिक माफी की मांग कर रहे हैं।
सीसीटीवी फुटेज से खुलासे
इस बीच घटना का एक सीसीटीवी वीडियो भी सामने आया है, जिसने मामले को नया तूल दे दिया है। फुटेज में दिख रहा है कि पुलिस ने सुरक्षा घेरा बनाया था, जिसे शिष्यों द्वारा तोड़ने की कोशिश की गई। इसी दौरान पुलिस और संतों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। पुलिस ने कुछ शिष्यों को हिरासत में भी लिया है।
जिद पर अड़े दोनों पक्ष
फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। प्रशासन अपने सुरक्षा प्रोटोकॉल और कोर्ट के आदेश का हवाला दे रहा है, तो दूसरी तरफ स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद इसे धर्म और परंपरा पर हमला बता रहे हैं। उन्होंने प्रण लिया है कि जब तक प्रशासन अपनी गलती नहीं मानता, वे कैंप में नहीं जाएंगे और सड़क पर ही रहेंगे। प्रयागराज का माघ मेला अब आस्था के साथ-साथ इस हाई-प्रोफाइल ‘धर्म-युद्ध’ का गवाह बन रहा है।
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