UP AQI : दीवाली से महज आठ दिन पहले, आगरा के संजय प्लेस और ताजगंज जैसे इलाकों में प्रदूषण की स्थिति गंभीर हो गई है। खुली हवा में निकलने पर खांसी और आंखों में जलन की समस्या उत्पन्न हो रही है। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, मेरठ, गाजियाबाद और नोएडा में भी वायु गुणवत्ता में गिरावट देखी जा रही है।
गाजियाबाद के लोनी इलाके में बुधवार सुबह वायु गुणवत्ता सूचकांक (एयर क्वालिटी इंडेक्स) 351 के खतरनाक स्तर पर पहुंच गया। नोएडा के सेक्टर 1 में 326 और लखनऊ के औद्योगिक क्षेत्र तालकटोरा में 223 एक्यूआई दर्ज किया गया। एक्यूआई के मानकों के अनुसार, 101 से 200 के बीच की स्थिति को खराब माना जाता है, जिससे फेफड़े, दिल और अस्थमा के मरीजों को सांस लेने में कठिनाई हो सकती है।
विभिन्न शहरों की वायु गुणवत्ता
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, लखनऊ के बीआर अंबेडकर यूनिवर्सिटी के पास एक्यूआई 202, गोमती नगर में 172, और अन्य इलाकों में भी स्थिति चिंताजनक रही। आगरा के मनोहरपुर में 119 और संजय प्लेस के पास 260 एक्यूआई दर्ज किया गया, जबकि ताजगंज में यह और भी खराब था, जहां पीएम 2.5 की मौजूदगी 332 माइक्रोग्राम प्रति मीटर (एमपीएम) रही।
प्रदूषण के कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि त्यौहारी सीजन के दौरान बाजारों में बढ़ी खरीदारी और वाहनों की आवाजाही ने प्रदूषण में इजाफा किया है। अधिक वाहन जाम में फंसकर अधिक उत्सर्जन करते हैं, जिससे वायु गुणवत्ता खराब होती है। इसके साथ ही, निर्माण कार्य और खुले में रखी सामग्री भी प्रदूषण को बढ़ाने में योगदान कर रही है।
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दीवाली की तैयारी और प्रदूषण
आगरा में आवास विकास क्षेत्र भी प्रदूषण की चपेट में आ गया है। दीवाली की सफाई और रंगाई-पुताई का काम तेजी से चल रहा है, जिससे धूल के कणों में वृद्धि हो रही है। इस स्थिति का असर दीपावली की आतिशबाजी के बाद भी लंबे समय तक बना रह सकता है।
प्रदूषण की यह गंभीर स्थिति न केवल स्वास्थ्य पर असर डाल रही है, बल्कि त्योहारों के आनंद को भी प्रभावित कर रही है। इस समस्या को हल करने के लिए स्थानीय प्रशासन और नागरिकों को मिलकर कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि स्वच्छ हवा में सांस लेना संभव हो सके।


