UP AQI Today : उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों में वायु प्रदूषण ने खतरनाक रूप ले लिया है, खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में, जहां दिवाली के करीब आने से प्रदूषण के स्तर में और वृद्धि देखी जा रही है। इस प्रदूषण का मुख्य कारण हवा में सूक्ष्म कणों और जहरीली गैसों का बढ़ता मिश्रण है, जिसमें कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) की मौजूदगी सबसे चिंताजनक है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ इलाकों में CO का स्तर 100 माइक्रोग्राम प्रति मीटर से भी अधिक हो गया है, जबकि इसे 4.0 माइक्रोग्राम प्रति मीटर से अधिक नहीं होना चाहिए।
प्रदूषण का ख़तरनाक स्तर
पश्चिमी उत्तर प्रदेश, खासकर गाजियाबाद, मेरठ, और आसपास के इलाकों में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। गाजियाबाद के वसुंधरा इलाके में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 448 दर्ज किया गया है, जो “खतरनाक” श्रेणी में आता है। इसी तरह, मेरठ का AQI 310 रिकॉर्ड किया गया, जो कि “खतरनाक” श्रेणी में आता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों के अनुसार, AQI का यह स्तर 36 गुना अधिक है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, रविवार को लखनऊ के तालकटोरा क्षेत्र में AQI 320, केंद्रीय विद्यालय क्षेत्र में 298 और लालबाघ में 358 दर्ज किया गया। अन्य प्रमुख शहरों जैसे कानपुर, गोरखपुर, और मुरादाबाद में भी प्रदूषण के स्तर में भारी वृद्धि देखी गई है।
गंभीर स्थिति वाले इलाके
मेरठ के गंगानगर में सुबह 246, जयभीमनगर में 328, और पल्लयवपुरम में 350 AQI दर्ज किया गया। गाजियाबाद के संजय नगर में 351, इंदिरापुरम में 347, लोनी में 435 और वसुंधरा में 448 AQI था। मुरादाबाद के कांशीरामनगर में AQI 182 था, जबकि ट्रांसपोर्टनगर में 130 AQI था।
गोरखपुर में भी स्थिति चिंताजनक रही, जहां एमएमएमयूटी क्षेत्र में AQI 217 था। वहीं कानपुर के कल्याणपुर में 314 और नेहरू नगर में 298 AQI दर्ज किया गया। नोएडा के सेक्टर 1 में 317, लॉजिक्स इंफोटेक पार्क में 341, और नॉलेज पार्क 3 में 403 AQI दर्ज हुआ।
प्रयागराज, बरेली और आगरा में भी प्रदूषण के स्तर में वृद्धि देखी जा रही है। प्रयागराज के नगर निगम क्षेत्र में AQI 86 और झूंसी में 87 था। आगरा के रोहता में AQI 93, संजय पैलेस में 101, मनोहरपुर में 82, शास्त्रीपुरम में 95 और आवास विकास कॉलोनी में 121 AQI दर्ज किया गया। बरेली के राजेन्द्रस नगर में 73 AQI था।
प्रदूषण के स्वास्थ्य पर प्रभाव
उक्त सभी आंकड़े यह दर्शाते हैं कि उत्तर प्रदेश के अधिकांश इलाके अब वायु प्रदूषण के खतरनाक स्तर पर पहुंच चुके हैं, जो खासकर श्वसन तंत्र के लिए अत्यधिक नुकसानकारी हो सकता है। लंबे समय तक इन खतरनाक स्थितियों में सांस लेना अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और अन्य श्वसन संबंधी समस्याओं को जन्म दे सकता है।
साथ ही, कार्बन मोनोऑक्साइड जैसे जहरीले गैसों का स्तर भी गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा कर सकता है, क्योंकि यह शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति में बाधा डालता है। इसके प्रभाव से सिरदर्द, चक्कर आना, थकान और अत्यधिक मामलों में मृत्यु भी हो सकती है।
दिवाली और इसके बाद बढ़ेगा प्रदूषण
प्रदूषण के स्तर में तेजी से वृद्धि होने की एक बड़ी वजह दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान पटाखों का धुंआ भी है। ऐसे में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रशासन को इस समस्या का समाधान शीघ्र निकालने की जरूरत है, ताकि आने वाले दिनों में इन खतरनाक स्थितियों से बचा जा सके।


