UP Politics : उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में डकैती के आरोपी मंगेश यादव के एनकाउंटर ने सियासी पारा बढ़ा दिया है। विपक्षी दलों ने इस एनकाउंटर को फर्जी करार दिया है, जिसके बाद राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार को निशाने पर लिया है। उन्होंने पुलिस मुठभेड़ की वैधता पर सवाल उठाते हुए इसे सत्ता का दुरुपयोग बताया है।
योगी सरकार का बचाव
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (UP) ने विपक्ष के आरोपों का सख्त जवाब दिया। अंबेडकरनगर में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा, “यदि लूट के दौरान डकैत किसी ग्राहक को गोली मार देता, तो क्या सपा उसकी जान वापस कर पाती?” उन्होंने सपा और अखिलेश यादव पर तीखा हमला करते हुए कहा कि जब उनका कोई माफिया या डकैत पुलिस मुठभेड़ में मारा जाता है, तो ऐसा लगता है कि पुलिस ने उनकी दुखती रग पर हाथ रख दिया हो। उनके अनुसार, अपराधियों का बचाव करने की इस तरह की राजनीति जनता के सामने स्पष्ट होनी चाहिए।
अखिलेश का पलटवार
अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी के बयानों पर पलटवार किया और उन्हें ‘जानेवालों’ की बात कहकर तंज कसा। उन्होंने सोशल मीडिया “एक्स” पर एक पोस्ट के माध्यम से कहा, “जिनकी अपने दल में कोई सुनवाई नहीं, उनकी बातें कौन सुने, वैसे भी जानेवालों की बात का क्या बुरा मानना।” सपा प्रमुख ने महोबा में एक क्रशर कारोबारी की मौत और बर्खास्त आईपीएस अधिकारी मणिलाल पाटीदार के फरार होने जैसे मामलों का जिक्र करते हुए योगी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा, भाजपाई खुद ही पुलिस का अपहरण कर रहे हैं, और बुलडोजर संहिता ने दंड संहिता की जगह ले ली है।
कानून-व्यवस्था पर राजनीतिक घमासान
इस पूरे विवाद ने उत्तर प्रदेश (UP) की कानून-व्यवस्था और पुलिस की मुठभेड़ नीति पर नई बहस छेड़ दी है। एक ओर जहां योगी आदित्यनाथ इसे अपराधियों के खिलाफ कड़ा संदेश बता रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे सत्ता के दुरुपयोग और न्यायिक प्रक्रियाओं की अनदेखी मान रहा है। अखिलेश यादव ने सरकार पर आरोप लगाया कि राज्य में कानून-व्यवस्था नाममात्र की रह गई है और सरकार केवल बुलडोजर की राजनीति कर रही है।
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पुलिस एनकाउंटर की वैधता पर सवाल
राहुल गांधी और अखिलेश यादव दोनों ने इस मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पुलिस की कार्रवाई सही थी या नहीं। पुलिस एनकाउंटर पर अक्सर सवाल उठते रहे हैं, खासकर तब, जब यह आरोप लगता है कि मुठभेड़ योजनाबद्ध तरीके से की गई थी। एनकाउंटर का इस्तेमाल अपराधियों से निपटने के लिए एक रणनीति के रूप में किया जा सकता है, लेकिन जब यह आरोप लगते हैं कि इन्हें राजनीतिक दबाव या व्यक्तिगत लाभ के लिए अंजाम दिया गया, तो इसका नैतिक और कानूनी आधार कमजोर हो जाता है।


