UP Politics : उत्तर प्रदेश की 10 विधानसभा सीटों में से 9 सीटों पर होने वाले उपचुनाव की चुनाव आयोग ने घोषणा कर दी है। हालांकि, अयोध्या जिले की मिल्कीपुर सीट पर मतदान का ऐलान नहीं हो सका है। इसका कारण पूर्व विधायक गोरखनाथ बाबा द्वारा दाखिल की गई याचिका है, जो अवधेश प्रसाद (मिल्कीपुर के पूर्व विधायक और वर्तमान सांसद) के चुनाव के खिलाफ हाई कोर्ट में लंबित है।
गोरखनाथ बाबा ने अपनी याचिका वापस लेने का फैसला लिया है, जिससे अब उपचुनाव की संभावना बढ़ गई है। इस मामले पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बयान दिया है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) चुनाव में हार के डर से विभिन्न रणनीतियाँ बना रही है।
अखिलेश यादव का बयान
अखिलेश यादव (UP Politics) ने कहा, मिल्कीपुर का चुनाव अपने सर्वे में भाजपा हार रहे थे। इसलिए उन्होंने पहले BLO बदले, पिछड़े और दलित सभी हटा दिए। इसके बाद फिर इंटर्नल सर्वे कराया। मुख्यमंत्री कई बार गए और प्रशासन के लोगों को बुलाकर पूछा। इंटेलिजेंस रिपोर्ट से पता चला कि वे चुनाव हार रहे हैं। इतने खेल खेलने के बाद भी जो जंग में आने से पहले ही हार गए, वे अब अपनी बदनामी बचाने के लिए कोर्ट और चुनाव आयोग का चक्कर लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर दो दिन के अंदर भाजपा अपनी याचिका वापस नहीं लेती है, तो चुनाव नहीं होगा।
उपचुनाव की संभावनाएँ
निर्वाचन आयोग ने मंगलवार को महाराष्ट्र, झारखंड, वायनाड, और नांदेड़ लोकसभा सीट सहित 15 राज्यों की विधानसभा में खाली 48 सीटों पर उपचुनाव कराने की घोषणा की। लेकिन मिल्कीपुर में चुनाव याचिका लंबित है, जिससे उपचुनाव की घोषणा नहीं हो सकी।
मिल्कीपुर में उपचुनाव की संभावनाएँ अगले कुछ हफ्तों में बढ़ सकती हैं, खासकर बशीरहाट लोकसभा सीट और जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला के इस्तीफे के बाद। संभावना है कि ये उपचुनाव अगले साल जनवरी में दिल्ली विधान सभा चुनाव के साथ कराए जाएँगे।
गोरखनाथ बाबा का निर्णय
गोरखनाथ बाबा (UP Politics) ने बताया, हमने उपचुनाव का रास्ता साफ करने के लिए केस वापस लेने का फैसला किया है। 2-3 दिन में उपचुनाव का रास्ता साफ हो जाएगा और आयोग को सूचित कर देंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता था कि उनकी याचिका के कारण चुनाव रोक दिया जाएगा।
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गोरखनाथ बाबा का कहना है कि 2022 में समाजवादी पार्टी के अवधेश प्रसाद ने जो सबूत पेश किए थे, वे गलत थे। अब जब उपचुनाव की घोषणा नहीं हुई, तो उन्हें भी आश्चर्य हुआ और वह तुरंत संगठन से मिलने लखनऊ आए।


